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सोमवार, 03 मार्च, 2008 को 14:49 GMT तक के समाचार

जोनाथन मार्कस
बीबीसी के कूटनीतिक मामलों के संवाददाता

ग़ज़ा हमले के बाद इसराइल के विकल्प?

इसराइल ने ग़ज़ा पट्टी से अपनी थल सेना को वापस बुला लिया है लेकिन ग़ज़ा पर इसराइली हवाई हमले जारी जारी हैं और सात और फ़लस्तीनी मारे गए हैं. पिछले बुधवार से ग़ज़ा पर इसराइली हमलों में सौ से ज़्यादा फ़लस्तीनी मारे गए हैं.

बीबीसी संवाददाता जोनाथन मार्कस का कहना है कि ग़ज़ा पट्टी के उत्तरी इलाक़े में काफ़ी अंदर घुसकर इसराइल ने जो अभियान चलाया उसे नाम दिया गया था - ऑपरेशन हॉट विंटर और यह अभियान दिखाता है कि किस तरह से आहिस्ता-आहिस्ता शुरू होते एक युद्ध में यह एक महत्वपूर्ण लड़ाई थी.

इसराइल की तरफ़ से यह एक ब्रिगेड के स्तर का हमला था जिसके दौरान जबालया और बीत हनौन इलाक़ों पर क़ब्ज़ा करके इसराइल का मक़सद फ़लस्तीनियों की तरफ़ से इसराइल में दागे जा रहे रॉकेट हमलों को रोकना था.

साथ ही इस हमले का एक मक़सद फ़लस्तीनी संगठन हमास की सैन्य शाखा को जान-माल का भारी नुक़सान भी पहुँचाना था.

उधर हमास ने इस अवसर का इस्तेमाल मज़बूती के साथ मुक़ाबला करने और दक्षिणी इसराइल में रॉकेट हमले जारी रखने के लिए किया.

इसराइल के सैनिक अधिकारियों ने यह स्वीकार किया है कि पिछले कुछ दिनों में उसके सैनिकों ने ग़ज़ा में जो हमले किए हैं वोदरअसल एक ऐसे बड़े हमले की पूर्व तैयारी थी जिसकी योजना को पहले ही अंतिम रूप दिया जा रहा है.

इस तरह देखा जाए तो ऑपरेशन हॉट विंटर ने दरअसल उन समस्याओं और कठिनाइयों का पहले से ही अंदाज़ा करा दिया है जो इसराइल के उस अभियान में आ सकती हैं जो वह ग़ज़ा पट्टी के एक बड़े हिस्से पर क़ब्ज़ा करने के लिए चलाने की योजना बना रहा है.

शुरूआती तौर पर देखा जाए तो फ़लस्तीनियों को इसराइल के इस हमले में जानमाल का भारी नुक़सान हुआ है, हालाँकि अभी इस मुद्दे पर बहस जारी है कि मारे गए फ़लस्तीनियों में कितने लड़ाके थे लेकिन यह भी एक सच्चाई है कि इस लड़ाई में बहुत से आम फ़लस्तीनी हताहत हुए हैं.

यह एक ऐसी समस्या है जो घनी आबादी वाले या उसके आसपास के किसी इलाक़े में लड़ाई के दौरान सामने आती है. इसराइली सेना को कम ही नुक़सान हुआ है लेकिन जो कुछ भी हुआ, वह बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

इस लड़ाई में इसराइल के दो सैनिक मारे गए हैं जिससे संकेत मिलता है कि इसराइल की तरफ़ से अगर कोई बड़ा हमला किया जाता है तो उसे भी नुक़सान उठाना पड़ेगा.

इसराइल के इस हमले में जो आम फ़लस्तीनी मारे गए हैं उनकी वजह से इसराइल को कूटनीतिक मोर्च पर क़ीमत चुकानी पड़ी है और यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र ने इसराइल की कड़े शब्दों में निंदा की है.

इतना ही नहीं, इन परिस्थितियों में भी कोई बदलाव नहीं आया है कि ग़ज़ा क्षेत्र में इसराइली हमले के बावजूद वहाँ से इसराइल में दागे जाने वाले फ़लस्तीनी रॉकेटों में कोई कमी नहीं आई है.

इस तरह ऑपरेशन हॉट विंटर ने इसराइल के सामने यह समस्या खड़ी कर दी है कि इस हमले के बावजूद अगर फ़लस्तीनी रॉकेट हमलों में कमी नहीं आती है तो इसराइल के सामने आख़िर क्या विकल्प बचेंगे.