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गुरुवार, 28 फ़रवरी, 2008 को 00:40 GMT तक के समाचार

इराक़ में तुर्की सेना की मौजूदगी पर चिंता

उत्तरी इराक़ में तुर्की की सेना की मौजूदगी अब चिंता का विषय बनती जा रही है और अगर इससे निपटा न गया तो यह गंभीर कूटनीतिक विवाद की वजह बन सकता है.

पिछले कुछ तुर्की की सेना इराक़ की सीमा में घुसकर कुर्द विद्रोहियों के शिविरों पर हमले कर रही है लेकिन तुर्की यह बताने को तैयार नहीं है कि उसकी सेना कब इराक़ के सीमा क्षेत्र से वापस लौटेगी.

दूसरी ओर, इराक़ सरकार अपने सीमा क्षेत्र में तुर्की सेना की मौजूदगी से बेहद नाराज़ है और उसका कहना है कि एक हफ़्ते से इराक़ की सीमा में चल रहा सैनिक अभियान इराक़ की संप्रभुता का उल्लंघन है और यह इराक़ की स्वीकार नहीं है.

लेकिन तुर्की काफ़ी दबाव के बावजूद ये बताने को तैयार नहीं है कि किस तारीख़ तक उसकी सेना इराक़ की सीमा छोड़ देगी.

पिछले कुछ दिनों से तुर्की की सेना उत्तरी इराक़ में घुसकर सैनिक अभियान चला रही है. तुर्की का कहना है कि सैनिक अभियान का उद्देश्य कुर्द विद्रोहियों से निपटना है.

इस बीच भारत यात्रा के बाद अमरीका के रक्षामंत्री रॉबर्ट गेट्स तुर्की पहुँच गए हैं और वहाँ इस स्थिति का हल निकालने की कोशिश कर रहे हैं.

दबाव

उधर तुर्की पर दबाव बनाते हुए अमरीका ने कहा है कि तुर्की का यह सैनिक अभियान हफ़्तों में नहीं बल्कि कुछ ही दिनों में ख़त्म हो जाना चाहिए. इसी के मद्देनज़र अमरीकी रक्षामंत्री रॉबर्ट गेट्स तुर्की पहुँच गए हैं.

पर अमरीका में तुर्की के राजदूत नबी सेनसॉय का कहना है कि तुर्की के सैनिक अभियान का एक उद्देश्य है जिसे पूरा करके ही सेना की वापसी होगी.

तुर्की का कहना है कि जब तक वो कुर्द विद्रोही संगठन पीकेके के उत्तरी इराक़ स्थित चरमपंथी शिविरों को तहस-नहस नहीं कर देता तब तक उसकी सेना ये अभियान जारी रखेगी. तुर्की का दावा है कि उन्होंने कम से कम 200 चरमपंथियों को मार डाला है.

अमरीका ने अभी तक तुर्की के सैनिक अभियान को समर्थन दिया है और यही कारण है कि इराक़ ने तुर्की के हमले का प्रतिकार नहीं किया है.

अमरीका की सहमति के बिना इराक़ और तुर्की के बीच ये स्थिति गंभीर कूटनीतिक विवाद बन सकती थी लेकिन अब अमरीका के रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स कह रहे हैं कि तुर्की की सेना को कुछ ही दिनों में इराक़ से लौट जाना चाहिए था.