रविवार, 24 फ़रवरी, 2008 को 18:21 GMT तक के समाचार
ब्रजेश उपाध्याय
बीबीसी संवाददाता, वाशिंगटन
अमरीका में राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी की दौड़ एक साबुन के पुराने विज्ञापन की तरह लगने लगी है-चलता ही जाए, चलता ही जाए.
इस उम्मीदवारी के लिए प्रचार तो लगभग 13 महीनों से चल रहा है.
लेकिन चुनाव की शुरूआत हुए भी दो महीने हो चुके हैं और फिर भी इस साल नवंबर में व्हाइट हाउस के लिए कौन मैदान में होगा इसका फ़ैसला नहीं हो पाया है.
रिपब्लिकन पार्टी की बात करें तो वहां फिर भी तस्वीर काफ़ी हद तक साफ़ हो गई है और लगभग तय है कि जॉन मैक्केन ही उम्मीदवार बनेंगे क्योंकि उनके और दूसरे नंबर के उम्मीदवार माइक हकबी के बीच फ़ासला अब इतना बड़ा है कि शायद ही उन्हें कोई ख़तरा हो.
बल्कि उन्होंने तो अपनी पार्टी के उम्मीदवारों की जगह अब डेमोक्रेटिक पार्टी और ख़ासकर बराक ओबामा पर निशानेबाज़ी शुरू कर दी है.
उनका कहना है,'' मैं हर दिन ये कोशिश करूंगा की अमरीका एक ऐसे व्यक्ति के हाथों छला नहीं जाए जो बातें तो लच्छेदार करता है लेकिन उनमें ठोस कुछ भी नहीं होता.''
यानि सीधा हमला कि जो ओबामा कह रहे हैं वो बस लच्छेदार बातें हैं उनमें दम नहीं है.
लेकिन जिस बराक ओबामा को जॉन मैक्केन हवाई किला बनानेवाला उम्मीदवार कह रहे हैं उसी ओबामा ने डेमोक्रेटिक रेस में हिलेरी क्लिंटन की नींद उड़ा रखी है.
वो लगातार 11 जीत हासिल कर चुके हैं और अगर सट्टेबाज़ों की सुनें तो जितने भी दांव हैं उन्हीं पर लग रहे हैं.
उनके जोश से भरे भाषणों की ओर वोटर ऐसे खिंचे चले आ रहे हैं जैसे गुड़ की ओर मक्खी.
और हिलेरी क्लिंटन को भी लोगों से बार बार कहना पड़ रहा है बातों पर नहीं जाओ, काम को देखो.
ओबामा ने अपने अंदाज़ में एक ज़बरदस्त भाषण में उन्हें जवाब दिया कि आज अमरीका को ऐसी बातों की ज़रूरत है जो उन्हें बदलाव के लिए प्रेरित कर सके.
दिलचस्प मुक़ाबला
लेकिन यहीं एक मज़ेदार बात हो गई है.
पता चला कि ये जवाब और जिन भाषणों को ओबामा की ख़ासियत मानी जा रही है, उन्होंने उसके कुछ हिस्से फ़ुल स्टॉप और कौमा समेत किसी और के भाषण से उठाया है और उसका ज़िक्र भी नहीं किया है.
ज़ाहिर है यू ट्यूब और इंटरनेट के ज़माने में इस तरह की बातें छिप नहीं सकती हैं.
यू ट्यूब पर एक ऐसा वीडियो इन दिनों काफ़ी चर्चा में है जिसमें पहले 2006 में मैसाच्यूसेट्स के गवर्नर का भाषण सुनाई देता है और फिर ओबामा उन्हीं शब्दों को अपने भाषण में दोहराते हैं
कोई और वक्त होता तो अमरीकी मीडिया किसी भी उम्मीदवार को इस मामले पर छलनी कर देती लेकिन ओबामा तो इन दिनों मीडिया के भी दुलारे बने हुए हैं.
कोई कह रहा है उनकी बातें शरीर में बिजली भर देती हैं तो कोई उन्हें जॉन एफ़ कैनेडी का दर्जा दे रहा है.
और भाषण के इस नकल को ऐसे दिखाया जा रहा है जैसे हिलेरी क्लिंटन ने उनकी ओर इशारा किया ये बड़ी ग़लती है.
लेकिन जो भी हो अमरीकी राजनीति इन दिनों उतनी ही मज़ेदार हो रखी है जैसे गांव की कुश्ती. कभी किसी की चित तो किसी की पट.
मीडिया की चाँदी
टेलीविज़न चैनल्स की चाँदी है, ढेर सारे विज्ञापन मिल रहे हैं, लोग टीवी सेट्स से चिपके पड़े हैं. तो फ़ैसला कब होगा, ये सवाल सबको खाए जा रहा है.
भले ही ओबामा हिलेरी के ख़िलाफ़ लगातार जीत हासिल कर रहे हों लेकिन डेलिगेट्स, यानि उन प्रतिनिधियों की संख्या जो आख़िर में उनके हक में वोट करते हैं.
दोनों की लगभग बराबरी पर ही है और जो अगले बड़े मुकाबले हैं, टैक्सास और ओहायो- वहां भी कोई आरपार का फ़ैसला हो जाए, ऐसा नहीं लगता.
हिलेरी दबी हुई हैं लेकिन अभी हार मानने से बहुत दूर हैं और ऐसे में जो बचे हुए राज्य हैं वहां भी मुक़ाबला जारी रहेगा और हो सकता है कि अगस्त में जब नेशनल कंवेशन होगा तभी शायद फ़ैसला हो.
डेमोक्रेटिक समर्थकों को डर बस इस बात का है कि तब तक दोनों ही उम्मीदवार आपस में ही इतना पसीना बहा चुके होंगे कि कहीं रिपब्लिकन उम्मीदवार को देखते ही हांफना न शुरू कर दें.