शनिवार, 16 फ़रवरी, 2008 को 20:45 GMT तक के समाचार
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि यह सही समय है जब इराक़ से पलायन करके शरणार्थियों की तरह रह रहे लोगों को वापस लौटाने पर विचार किया जाए.
संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी मामले के उच्चायुक्त एंटोनियो गटरेस और इराक़ सरकार के बीच इस बात के लिए सहमति बनी है कि ज़मीनी स्थितियों को जानने का प्रयास किया जाए कि क्या शरणार्थियों के लौटने के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल हैं.
इराक़ पर अमरीकी हमले के बाद कोई 40 लाख लोग अपना घर छोड़कर शरणार्थियों का जीवन जी रहे हैं.
इनमें से 20 लाख इराक़ी तो पड़ोस के देशों में चले गए हैं जबकि 20 लाख इराक़ी देश के भीतर ही दूसरी जगहों पर शरणार्थियों की तरह रह रहे हैं.
इराक़ी नेताओं से चर्चा के बाद बीबीसी से हुई बातचीत में एंटोनियो गटरेस ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र बग़दाद में अपने अंतरराष्ट्रीय कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोत्तरी करने जा रहा है.
उन्होंने बताया कि ये कर्मचारी इराक़ सरकार के साथ काम करेंगे और ज़मीनी परिस्थितियों का विस्तृत विश्लेषण करेंगे.
परिस्थितियाँ
उन्होंने कहा कि शरणार्थियों की वापसी के बारे में विचार करने के लिए यह ठीक समय है लेकिन आगे बढ़ने से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी वापसी की परिस्थियाँ अनुकूल हैं.
उन्होंने कहा, "उन्हें वापस बुलाने से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी सुरक्षा का पुख़्ता इंतज़ाम है और समाज में उनके घुलने-मिलने की परिस्थितियाँ हैं."
पिछले छह महीने में इराक़ के कई हिस्सों में सुरक्षा व्यवस्था में काफ़ी सुधार हुआ है लेकिन बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अभी भी स्थितियाँ एकदम दुरुस्त नहीं हैं.
इस बीच पड़ोसी देश सीरिया से कुछ शरणार्थियों की वापसी की सीमित उदाहरण सामने आए हैं लेकिन वे हर बार सफल नहीं हुए हैं.
सीरिया में कोई 15 लाख इराक़ी शरणार्थियों की तरह रह रहे हैं.
इसी तरह जॉर्डन में 10 लाख से अधिक इराक़ी शरणार्थी रह रहे हैं.
एंटोनियो गटरेस ने कहा है कि इन देशों ने शरणार्थियों की खुले दिल से और उदारता के साथ मदद की है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उसकी मदद करनी चाहिए.
उन्होंने कहा, "ये दोनों देश शरणार्थियों को अपने यहाँ रखने की बड़ी क़ीमतें चुका रहे हैं, आर्थिक स्तर पर भी और सामाजिक स्तर पर भी."