गुरुवार, 14 फ़रवरी, 2008 को 14:55 GMT तक के समाचार
लेबनान की राजधानी बेरूत में दो गुटों के लोगों ने गुरूवार को अलग-अलग श्रद्धांजलि सभाओं में हिस्सा लिया जिसकी वजह से शहर में काफ़ी तनाव रहा.
लेबनान के पूर्व प्रधानमंत्री रफ़िक हरीरी की फ़रवरी 2005 में एक कार बम धमाके में हुई मौत की तीसरी बरसी के मौक़े पर हज़ारों लोगों ने बेरूत में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जिसमें मुख्य रूप से सीरिया विरोधी गुटों ने हिस्सा लिया.
उधर हिज़्बुल्लाह के दिवंगत नेता इमाद मूग़नीयेह का गुरूवार को बेरूत से कुछ किलोमीटर दूर अंतिम संस्कार किया गया जिसमें संगठन समर्थकों ने भारी संख्या में हिस्सा लिया.
इमानद मूग़नीयेह के अंतिम संस्कार में ईरानी विदेश मंत्री मनुचेहर मुत्तकी ने भी हिस्सा लिया है और हिज़्बुल्लाह के मुखिया हसन नसरल्लाह जनाज़े में शामिल हुए लोगों को संबोधित करेंगे.
हिज़्बुल्लाह ने इमाद के जनाज़े में शामिल हुए तमाम लोगों से ताबूत के पीछे-पीछे चलने का आग्रह किया और इमाद को "एक ऐसा नेता बताया जिसका नेतृत्व संगठन के लिए गौरव की बात रही है."
टेलीविज़न चैनल पर हिज़्बुल्लाह की तरफ़ से एक वक्तव्य पढ़ा गया जिसमें कहा गया, "हमें अपने दुश्मनों तक यह आवाज़ पहुँचानी चाहिए कि जीत हमारी होगी चाहे उसके लिए कितनी भी क़ुर्बानियाँ देनी पड़ें."
संवाददाताओं का कहना है कि ये घटनाएँ ऐसे मौक़े पर हो रही हैं जब देश में कोई राष्ट्रपति नहीं है और न ही कोई कार्यकारी संसद है जिससे स्थिति काफ़ी विस्फोटक नज़र आती है.
झड़पों की आशंका
इन अवसरों पर बेरूत और उसके आसपास सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम किए गए क्योंकि सीरिया विरोधी और समर्थक गुटों के बीच झड़पें होने का ख़तरा था.
सीरिया विरोधी और समर्थक गुटों को एक दूसरे से दूर रखने के लिए लगभग आठ हज़ार सैनिक जवान और आंतरिक सुरक्षा बलों के कर्मी तैनात किए गए हैं.
बेरूत में बीबीसी संवाददाता माइक सरजेंट का कहना है कि रफ़ीक हरीरी की मौत की तीसरी बरसी और इमाद मूग़नीयेह का जनाज़ा दो ऐसी घटनाएँ हैं जिनमें इन गुटों के समर्थक अपने आप ही अलग रहेंगे लेकिन ऐसी आशंका व्यक्त की गई है कि जहाँ मिश्रित आबादी है वहाँ लोगों में प्रतिद्वंद्वी गुटों के साथ झड़पें हो सकती हैं.
तीन साल पहले यानी फ़रवरी 2005 में रफ़ीक हरीरी की मौत के बाद से लेबनान में हालात काफ़ी उथल-पुथल वाले रहे हैं और 2006 में लेबनान पर इसराइली हमले से जानमाल की भारी तबाही हुई थी.
रफ़ीक हरीरी की मौत के बाद बड़े पैमाने पर सीरिया विरोधी प्रदर्शन हुए थे और अंतरराष्ट्रीय दबाव में सीरिया को लेबनान से अपने सैनिक हटाने पड़े थे. वर्ष 2005 के अंत तक सीरिया के सैनिक लेबनान से हटने के पहले पिछले क़रीब 29 साल से वहाँ थे.
रफ़ीक हरीरी की मौत की तीसरी बरसी बर गुरूवार को हज़ारों लोग बेरूत के शहीदी चौक पर इकट्ठा हुए जहाँ हरीरी को दफ़नाया गया है. इस मौक़े पर भारी बारिश हुई लेकिन लोग उसकी परवाह किए बिना हरीरी की श्रद्धांजलि सभा में इकट्ठा हुए.
इस मौक़े पर कुछ लोगों ने बैनर भी उठाए हुए थे जिनमें से एक पर लिखा था, "हमारी संसद को खोलो, सरकार को मुक्त करो, तुरंत एक राष्ट्रपति चुनो."