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मंगलवार, 12 फ़रवरी, 2008 को 02:54 GMT तक के समाचार

9/11 मामले में सैन्य अदालतों का विरोध

अमरीका में सरकारी दावों के बावजूद मानवाधिकार संगठनों और वकीलों ने ग्यारह सितंबर 2001 के हमलों के छह अभियुक्तों पर विशेष सैन्य आयोग के ज़रिए मुकदमा चलाने के फ़ैसले की आलोचना की है.

ग्यारह सितंबर 2001 को न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर समेत पेंटागन के दफ्तर पर हमले हुए थे जिसमें लगभग तीन हज़ार लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे.

इससे पहले अमरीका में आंतरिक सुरक्षा मामलों के प्रमुख माइकल चेरटॉफ़ ने वादा किया था कि 11 सिंतबर को हुए हमलों के अभियुक्तों को अपने बचाव का पूरा मौका दिया जाएगा. इन्हें ग्वांतानामों बे के सैन्य शिविर में हिरासत में रखा गया है.

इन हमलों के मामले में छह लोगों पर हत्या और षडयंत्र के आरोप औपचारिक रुप से तय किए जाने के बाद चेरटॉफ़ ने बीबीसी से बातचीत में ये विचार व्यक्त किए.

आतंकवाद के आरोपों का सामना करने वाले लोगों का प्रतिनिधित्व कर रही संस्था सेंटर फ़ॉर कॉन्स्टिच्यूशनल राइट्स ने सैन्य आयोग की व्यवस्था को अनैतिक व्यवस्था की संज्ञा दी है.

एक अन्य मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि यह ग़लत है कि यातनाएँ देकर एकत्र किए गए सबूत के आधार पर किसी को मृत्युदंड दिया जा सकता है.

मृत्युदंड की मांग

जिन लोगों पर आरोप तय किए गए हैं उनमें इन हमलों के कथित रुप से मुख्य षडयंत्रकारी खालिद शेख मोहम्मद भी शामिल हैं और अभियोजकों का कहना है कि वो इन सभी के ख़िलाफ़ मृत्युदंड की मांग करेंगे.

ये सभी अभियुक्त इस समय ग्वांतानामो बे सैन्य शिविर में बंद है जहां अगले कुछ महीनों में इनके ख़िलाफ़ विशेष सैन्य कमीशन सुनवाई शुरु कर सकता है.

हालांकि ग्वांतानामो बे में क़ैदियों के साथ किए जाने वाले व्यवहार की आलोचना होती रही है और यह भी कहा जाता रहा है कि इन क़ैदियों को अपनी बात कहने का मौका नहीं दिया जाता है.

शायद इसी कारण चेरटॉफ ने कहा है कि ख़ालिद मोहम्मद के साथ-साथ अन्य अभियुक्तों के ख़िलाफ जो भी सबूत जुटाए गए हैं उनकी जांच-परख न्यायाधीश करेंगे.

उल्लेखनीय है कि जांचकर्ताओं ने जिन तरीकों से ये सबूत जुटाए हैं उनकी भी आलोचना हुई है और आलोचकों के अनुसार ये तरीके प्रताड़ना के वर्ग में आते हैं.

वाशिंगटन से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि वकील मान रहे हैं कि उनके पास पर्याप्त सबूत हैं जिनसे इन अभियुक्तों को सज़ा दिलाई जा सकती है.