सोमवार, 11 फ़रवरी, 2008 को 17:40 GMT तक के समाचार
अमरीकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने 11 सितंबर, 2001 को अमरीका पर किए गए हमले में कथित रूप से शामिल छह लोगों के ख़िलाफ़ आरोपों की घोषणा की है.
ये लोग क्यूबा स्थिति अमरीकी नौसैनिक अड्डे ग्वांतानामो बे में बंद हैं.
अभियोजन पक्ष का कहना है कि वो इन छह लोगों को मौत की सज़ा की माँग करेगा.
इनमें ख़ालिद शेख मोहम्मद भी शामिल हैं. अमरीका का मानना है कि उन्होंने 11 सितंबर, 2001 को हुए हमलों में अहम भूमिका निभाई थी.
ग्वांतनामो शिविर में बंद क़ैदियों पर 11 सितंबर, 2001 के हमलों में सीधे शामिल होने का आरोप पहली बार लगाया गया है.
उल्लेखनीय है कि 11 सितंबर, 2001 के हमलों में तीन हज़ार लोगों की मौत हो गई थी.
ब्रिगेडियर जनरल टॉमस हर्टमैन ने कहा,'' अमरीका पर बेहद सुनियोजित तरीके से अल क़ायदा के हमले करने का मामला चलेगा.''
कहा जाता है कि ख़ालिद शेख मोहम्मद अल क़ायदा में तीसरे नंबर का कमांडर था और उसे मार्च, 2003 में पाकिस्तान से पकड़ा गया था.
ऐसी ख़बरें हैं कि उनका अमरीकी पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या में भी हाथ था.
उनके अलावा रमज़ी बिनालशिब, वालिद बिन अताश, अली अब्द अल अज़ीज़ अली, मुस्तफ़ा अल हवासवी और मोहम्मद अल क़हातनी पर मामला चलाया जाएगा.
सुनवाई
इसकी सुनवाई विवादास्पद सैन्य अदालत में होगी.
ग़ौरतलब है कि क्यूबा में अमरीकी नौसैनिक अड्डे ग्वांतनामो बे शिविर में 2001 से अनेक लोगों को बंदी बनाकर रखा गया था.
उनमें से कुछ को रिहा किया जा चुका है लेकिन लगभग 275 लोग अब भी वहाँ बंदी हैं और अमरीकी सरकार ने उन पर औपचारिक रूप से कोई आरोप निर्धारित नहीं किए हैं.
इस बंदीगृह से प्रताड़ना और दुर्व्यवहार की ख़बरें मिलती रही हैं.
ग्वांतानामो बे में क़ैदियों के साथ हो रहे बर्ताव का अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाएँ निंदा करती रही हैं. अमरीका के कई मित्र देश भी इसका विरोध करते रहे हैं.
कुछ समय पहले बुश प्रशासन ने एक क़ानून बनाया था. इसके तहत ग्वांतानामो बे के बंदियों को अमरीका की सामान्य अदालतों में अपील करने के अधिकार से वंचित कर दिया गया था.
इस क़ानून में प्रावधान है कि ग्वांतानामो बे के बंदियों की मामले सिर्फ़ विशेष सैन्य अदालत में सुने जाएँगे न कि अमरीका की सामान्य अदालतों में.