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मंगलवार, 05 फ़रवरी, 2008 को 04:06 GMT तक के समाचार

चाड की मदद के लिए संयुक्त राष्ट्र आया

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने चाड में विद्रोहियों के तख्तापलट की कोशिशों की आलोचना करते हुए चाड के राष्ट्रपति इद्रीस देबी का समर्थन किया है.

फ़्राँस ने कहा है कि उसका विद्रोहियों पर हमला करने का कोई इरादा नहीं है. लेकिन अमरीका का कहना है कि फ़्राँस को चाड में प्रभावी भूमिका निभानी चाहिए.

अब सबकी नज़रें फ़्राँस के ऊपर हैं जिसके डेढ़ हज़ार सैनिक चाड में मौजूद हैं और जिसका वहाँ एक स्थायी सैनिक अड्डा भी है.

उल्लेखनीय है कि अफ़्रीका के पाँचवे सबसे बड़े देश चाड में विद्रोही तख़्तापलट करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं.

विद्रोहियों का ने दावा किया था कि उन्होंने राजधानी जामेना पर कब्ज़ा कर लिया है. हालांकि चाड के वित्त मंत्री ने इसका खंडन किया था.

चाड में ऐसी तीन चीज़ें हैं जो कई प्रमुख देशों को किसी न किसी रूप में वहाँ प्रभाव बनाने के लिए आकृष्ट करती हैं.

चाड में सोने और यूरेनियम की खदानें हैं और वर्ष 2003 में चाड पेट्रोलियम निर्यातक देश भी बन गया है.

चाड की राजधानी जामेना में तीन दिन तक चली लड़ाई के बाद आज स्थिति ये है कि राजधानी में चाड सरकार के सुरक्षा बल हैं लेकिन बाहर विद्रोहियों की सेना घेरा डाले बैठी है.

आलोचना

संयुक्त राष्ट्र ने विद्रोहियों की आलोचना की है और जो देश मदद करना चाहे उसे चाड के राष्ट्रपति इद्रीस देबी की मदद करने के लिए आगे आने का संकेत दे दिया है.

संयुक्त राष्ट्र आज खुलकर चाड की सरकार के पक्ष में आ गया. इतना ही नहीं संयुक्त राष्ट्र में अमरीका के राजदूत ज़ल्मे खलीलजाद ने भी फ़्राँस को कुछ करने के लिए हरी झंडी दे दी, “ फ़्राँस इस इलाक़े को जानता है, समझता है. अगर फ्राँस इस मामले में आगे क़दम बढ़ाता है तो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद उसके साथ होगी.”

जानकार कहते हैं कि चाड के विद्रोहियों को पड़ोसी देश सूडान का समर्थन है और उसी के बल पर वो इतना आगे बढ़ सका है.

सूडान के दारफ़ूर इलाक़े के विवाद को लेकर अमरीका पहले ही उससे नाराज़ है. चाड पर फ़्राँस लंबे समय तक राज कर चुका है. जानकार कहते हैं कि चाड की सरकार को फ़्राँस हथियार और विद्रोहियों के बारे में खुफ़िया जानकारी देता रहा है और चाड में ये सब फ़्राँस वहाँ बने अपने स्थाई सैनिक अड्डे के बल पर करता है.

फ्राँस के विदेश मंत्रि बर्नार्ड कुश्नेर ने बीबीसी के नेटवर्क एफ़्रिका कार्यक्रम से बातचीत में ये कहा, “ विद्रोही चाड में पीछे हटे हैं लेकिन वो फिर से जीत हासिल करने की कोशिश करेंगे. अभी ये लड़ाई ख़त्म नहीं हुई है.”

अब फ़्राँस को ये एहम फ़ैसला करना है कि जब विद्रोही वापिस तख्तापलट की कोशिश करते हैं तो फ़्राँस की सेना राष्ट्रपति देबी की तरफ़ से विद्रोहियों पर हमला करे या वो तटस्थ रहकर चाड के दोनों पक्षों के बीच ताकतवर सेना को जीतने का मौका दे.