गुरुवार, 31 जनवरी, 2008 को 03:13 GMT तक के समाचार
ईरान में सरेआम फाँसी देने की प्रथा को नियंत्रित करने की पहल हुई है. किसी को सार्वजनिक रूप से फाँसी देने से पहले मुख्य न्यायाधीश की अनुमति लेनी होगी.
ईरान के मुख्य न्यायाधीश अयातुल्ला महमूद हाशमी ने फाँसी की तस्वीर प्रकाशित करने या उसकी फ़िल्म प्रसारित करने पर भी रोक लगा दी है.
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि वर्ष 2007 में लगभग तीन सौ लोगों को फाँसी की सज़ा दी गई.
फाँसी की सज़ा देने के पीछे ईरान का तर्क है कि वो सुरक्षा बढ़ाने और अनैतिक आचरण की घटनाओं को कम करने की कोशिश कर रहा है.
ईरान में ज़्यादातर लोगों को जेल के भीतर ही फाँसी की सज़ा दी जाती है लेकिन कुछ अपराधियों को सार्वजनिक स्थानों पर ये सज़ा मिलती है.
इसके लिए बकायदा एक क्रेन का इस्तेमाल होता है और इसी के सहारे मुज़रिम को फाँसी पर लटका दिया जाता है.
बड़ी संख्या में फाँसी की सज़ा देने के लिए ईरान की अंतरराष्ट्रीय आलोचना होती रही है.
इस वर्ष अब तक 28 अभियुक्तों को फाँसी की सज़ा दी जा चुकी है.
ईरान में हत्या, बलात्कार, डकैती, मादक द्रव्यों की तस्करी और समलैंगिक संबंध बनाना ऐसे अपराध हैं जिनके लिए फाँसी की सज़ा का प्रावधान है.