सोमवार, 14 जनवरी, 2008 को 12:18 GMT तक के समाचार
इसराइल और फ़लिस्तीनी नेताओं ने शांतिवार्ता के लिए विवादास्पद माने जाने वाले मुद्दों पर यरुशलम में बातचीत शुरू कर दी है.
इनमें यरुशलम की स्थिति, फ़िलिस्तीन राज्य की सीमा, पश्चिमी तट पर यहूदियों का बसना, शरणार्थियों, सुरक्षा और जल संसाधन के मुद्दे प्रमुख हैं.
इस बातचीत का नेतृत्व इसराइल के विदेश मंत्री ज़िपी लिवनी और पूर्व फ़िलिस्तीनी प्रधानमंत्री अहमद कुरैई कर रहे हैं.
पिछले रविवार को गज़ा पर हुए एक हमले में तीन फ़िलिस्तीनी चरमपंथी मारे गए हैं.
उनके वाहन को इसराइली वायुसेना की एक मिसाइल ने तब उड़ा दिया जब वे गज़ा शहर के पास शाती शरणार्थी शिविर से गुज़र रहा था.
इसराइली सेना ने कहा कि वे दोनों इसराइल पर हमले के लिए ज़िम्मेदार थे.
इनमें से एक व्यक्ति निदाल अमुदि शहीदों की ब्रिगेड अल-अक्स का वरिष्ठ सदस्य था जो फ़िलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास के फ़तेह मूवमेंट से जुड़ा हुआ एक चरमपंथी गुट था.
अंतिम समझौता
रविवार को रामल्ला में दिये एक भाषण में महमूद अब्बास ने कहा था कि इसराइल और फ़लिस्तीन सोमवार को शांति प्रक्रिया के लिए निर्णायक समझे जाने वाले मुद्दों पर बातचीत शुरू करेंगे.
उन्होंने कहा, “अगर सभी मुद्दों पर समझौता हो जाता है तब हम यह कह सकते हैं कि यह निर्णायक समझौता है".
उन्होंने यह भी कहा कि शांति समझौते को सभी विवादों को ख़त्म करना होगा.
उन्होंने कहा, "दोनों पक्षों को एक ही समय पर ‘सड़क नक्शे’ के पहले फ़ेज़ को लागू करना होगा जिसे 2003 के मध्य पूर्व क्वार्टेट में बनाया गया था".
इसमें यह भी बताया गया था कि कैसे निर्णायक समझौते तक पहुँचा जा सकता है और कैसे यह पश्चिमी तट के आर्थिक और सुरक्षा मुद्दों को सुलझा सकता है.
हमास का प्रस्ताव
एनपॉलिस में पिछले नवंबर में हुई शांति वार्ता ने व्यापक समझौते की उम्मीद को ताज़ा हवा दी थी. जिसके बाद अब्बास और इसराइल के प्रधानमंत्री एहुद ऑल्मर्ट सात साल के बाद बातचीत के लिए राज़ी हो गए थे.
पिछले सप्ताह इसराइल और पश्चिमी तट का दौरा करने वाले अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि इसराइल और फ़िलिस्तीन एक साल के अंदर ही एक शांति समझौता कर सकते हैं.
बृहस्पतिवार को उन्होंने रामल्ला में पत्रकारों से कहा, "मैं मानता हूँ कि ऐसा ज़रूर होगा".
अपने भाषण में महमूद अब्बास ने बुश को चेतावनी देते हुए कहा, "अगर पश्चिमी तट पर यहूदियों को बसाया गया तो फ़लिस्तीन बातचीत के लिए आगे नहीं आएगा".
उन्होंने कहा कि अगर वहाँ सब जगह घर बनने लगे तो हम समझौता नहीं करेंगे.
उन्होंने यह भी कहा कि वे इस्लामी संगठन हमास से दोबारा बातचीत करना चाहते हैं जिससे वह गज़ा पट्टी पर अपना अधिकार छोड़ दे.
अब्बास ने कहा, "हम हमास से बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार हैं चाहे अमरीका इससे सहमत न हो. उन्होंने कहा कि यह बातचीत बहुत ज़रूरी है".
हमास के एक बयान ने अब्बास के भाषण को नकारते हुए इसे झूठ और जालसाज़ी से भरा हुआ बताया है.