रविवार, 13 जनवरी, 2008 को 02:35 GMT तक के समाचार
ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्ला अली ख़ामनेई ने कहा है कि ईरान के साथ परमाणु विवाद को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) को सुलझाना चाहिए न कि संयुक्त राष्ट्र को.
आईएईए के प्रमुख मोहम्मद अल बारादेई के साथ हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि अमरीका परमाणु मसले की आड़ में ईरान को घुटनों के बल झुकाने की कोशिश कर रहा है.
उन्होंने कहा है कि अमरीका को ऐसा नहीं करना चाहिए.
उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने परमाणु मसले पर सहयोग न करने का आरोप लगाते हुए ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए हैं.
अमरीका और यूरोपीय देशों का आरोप है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है जबकि ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों के लिए है.
अल बारादेई इन दिनों ईरान में हैं और वे ख़ामनेई से मिलने पहुँचे थे.
ईरान के सबसे ताक़तवर नेता ख़ामनेई आमतौर पर इस तरह की चर्चाएँ नहीं करते लेकिन उन्होंने आईएईए प्रमुख से मुलाक़ात का उपयोग अमरीका को चेतावनी देने के लिए किया.
उन्होंने अल बारादेई से कहा कि अमरीका को परमाणु मसले के बहाने से 'ईरान को तोड़ने की कोशिश' नहीं करनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि ईरान परमाणु बम नहीं बना रहा है और इस मसले पर तो संयुक्त राष्ट्र को विचार भी नहीं करना चाहिए.
उनका कहना था कि यह मसला तो आईएईए के हाथों सुलझाया जाना चाहिए.
'युद्धोन्मादी'
इस बीच ईरान के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने खाड़ी में हुई घटनाओं के हवाले से अमरीकियों को 'युद्धोन्मादी' कहा है.
लेकिन ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इस घटना से यह ज़ाहिर हो गया है कि ईरान खाड़ी में होर्मूज़ जल डमरूमध्य की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है.
उल्लेखनीय है कि होर्मूज़ जल डमरूमध्य में अमरीकी युद्धपोतों को कुछ ईरानी गश्ती नौकाओं ने रोक लिया था.
अमरीकियों का आरोप है कि ईरानी नौकाओं ने अमरीकी युद्धपोतों पर बमबारी करने की धमकी दी थी.
जबकि ईरान का कहना है कि वे अमरीकी युद्धपोतों को पहचान नहीं सके थे और जो कुछ हुआ वह अब ख़त्म हो गया है.