बुधवार, 09 जनवरी, 2008 को 15:46 GMT तक के समाचार
अमरीका में राष्ट्रपति पद के लिए मतदान चार नवंबर 2008 को होना है लेकिन इसकी गहमागहमी अभी से शुरु हो गई है.
दोनों मुख्य पार्टियों-डोमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार अपने अपने दल की ओर से नामांकित होने के लिए प्रतिस्पर्धा में है.
राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवारों के चयन की प्रकिया चार जनवरी से हो शुरू हो चुकी है.
हालांकि वर्तमान राष्ट्रपति जॉर्ज बुश 20 जनवरी 2009 से पहले अपना पद नहीं छोड़ेगें.
अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव से जुड़े कुछ सवालों के जवाब:
कौन-कौन है राष्ट्रपति चुनाव में मुख्य उम्मीदवार?
इस बार चुनावी मैदान में उतरने वाले उम्मीदवारों के साथ-साथ वो लोग भी चर्चा में है जो मैदान में नहीं है.
वर्ष 1928 के बाद ये पहला मौका है जब कोई वर्तमान राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति अपनी पार्टी की ओर से नामांकन की दौड़ में शामिल नहीं हुआ है. (केवल 1952 में तत्कालीन राष्ट्रपति ने उम्मीदवारी से अपना नाम वापस ले लिया था)
वर्ष 2008 में डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से तीन मुख्य उम्मीदवार हैं- सीनेटर हिलेरी क्लिंटन, सीनेटर बराक ओबामा और जॉन इडवर्ड्स.
जबकि रिपब्लिकन पार्टी से उम्मीदवारी की दौड़ में शामिल हैं- न्यूयॉर्क के पूर्व मेयर रुडी जूलियानी, अरकांसास के पूर्व गवर्नर माइक हक्बी, सीनेटर जॉन मैक्केन और मैसाचुसेट्स के पूर्व गवर्नर मिट रोमनी.
किस पार्टी के जीतने के आसार ज़्यादा है?
अक्तूबर में प्यू शोध केंद्र ने लिखा था कि ज़्यादातर राष्ट्रीय मत सर्वेक्षणों के मुताबिक डेमोक्रेटिक पार्टी के आसार ज़्यादा है.
शोध केंद्र का कहना था, चार वर्ष पहले के मुकाबले लोगों में असंतोष बहुत ज़्यादा है. इस दौरान राष्ट्रपति बुश की रेंटिंग 50 फ़ीसदी से गिरकर 30 फ़ीसदी पहुँच गई है. पिछले दो दशकों में देखा जाए तो रिपब्लिकन पार्टी के मुकाबले डेमोक्रेटिक पार्टी के पक्ष में इतने लोग कहीं नज़र नहीं आएँ हैं.
लेकिन सवाल ये है कि क्या डेमोक्रेटिक पार्टी ऐसा उम्मीदवार चुन पाएगा जो इस बात को भुना पाए.
चुनाव में मुख्य मुद्दे क्या हैं?
अमरीका में हुए विभिन्न सर्वेक्षणों के मुताबिक लोग जिन मुद्दों को अहम मानते हैं उनमें इराक़, अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, रोज़गार और राष्ट्रीय सुरक्षा शामिल हैं. हालांकि ये रुझान हर राज्य में अलग-अलग है. कई इलाक़ों में आप्रवासन मुख्य मुद्दा है.
वर्ष 2004 के चुनाव के मुकाबले कई मुद्दों को लोग कम अहमियत दे रहे हैं जैसे गर्भपात, स्टेम सेल शोध और समलैंगिक विवाह.
कोई भी उम्मीदवार अपनी पार्टी की ओर से नामांकन कैसे जीतता है?
ज़्यादातर राज्यों में इसके लिए मतदान होता है जिसे प्राइमरी कहा जाता है. प्राइमरी में लोग दोनों मुख्य पार्टियों की ओर से उस उम्मीदवार को चुनते हैं जिसे वो राष्ट्रपति को तौर पर देखना चाहते हैं. जबकि कुछ राज्यों में चुनावी प्रक्रिया को कौकस कहते हैं.
दोनों ही प्रक्रिया में होता ये है कि हर राज्य पार्टी के मुख्य सम्मेलन में कुछ प्रतिनिधि भेजता है जो एक विशेष उम्मीदवार का समर्थन करते हैं. ये सम्मेलन अगस्त या सितंबर में होता है.
जिस उम्मीदवार के पास ज़्यादा प्रतिनिधि होते हैं उसे पार्टी की ओर से नामांकित कर दिया जाता है. आमतौर पर ये प्राइमरी के दौरान स्पष्ट हो जाता है. माना जा रहा है कि इस बार फ़रवरी में पता चल जाएगा कि कौन उम्मदीवार जीत रहे हैं.
प्राइमरी और मतदान के बीच के समय में क्या होता है?
डेमोक्रेटिक पार्टी अपना सम्मेलन अगस्त में करेगी जबकि रिपब्लिकन पार्टी सितंबर में करेगी. राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार फिर 26 सितंबर, सात और 15 अक्तूबर को टेलीवीज़न पर होने वाली बहस में हिस्सा लेंगे. इसके लिए राज्यों में भी चुनावी अभियान होगा.
क्या जिस उम्मीदवार को सबसे ज़्यादा मत मिलेंगे वो राष्ट्रपति बन जाएगा?
ये ज़रूरी नहीं है. तकनीकी रूप से देखा जाए तो राष्ट्रपति के चुनाव में मतदाता सीधे तौर पर हिस्सा नहीं लेते. वे ऐसे लोगों (एलेक्टर) को चुनते हैं जो एक विशेष उम्मीदार को ही समर्थन देते हैं. यही एलेक्टर असल में राष्ट्रपति को चुनते हैं. इनकी संख्या 538 है. छोटे राज्यों के मुकाबले बड़े राज्यों में इनकी संख्या ज़्यादा है.
लगभग हर राज्य में जिस उम्मीदवार को पॉपुलर वोट मिलते हैं उसे राज्य के इलेक्टोरल कॉलेज के वोट भी मिल जाते हैं फिर चाहे उसे बहुत कम बहुमत क्यों न मिला हो. इसलिए ऐसा भी हो सकता है कि किसी उम्मीदवार के पास इलेक्टोरल कॉलेज के ज़्यादा वोट हों लेकिन वो पापुलर वोट उनके पास कम हों.
कौन-कौन से राज्य राष्ट्रपति चुनाव में अहम माने जा रहे हैं?
पिछले कुछ सालों में रुझान यही रहा है कि पूर्व और पश्चिम कोस्ट वाले ज़्यादातर राज्य डेमोक्रेटिक पार्टी को वोट देते हैं जबकि अन्य राज्य रिपब्लिकन पार्टी को. लेकिन कई राज्य ऐसे हैं जो किसी के भी पक्ष में मत डाल सकते हैं. इनमें फ़्लोरिडा, ओहायो, पेन्सिलवेनिया, एरिज़ोना, कोलोराडो, आयोवा, न्यू मैक्सिको आदि शामिल हैं.
क्या इस बार कोई तीसरा बड़ा उम्मीदवार सामने आ सकता है?
अगर तीसरे उम्मीदवार की बात करें, तो न्यूयॉर्क के मेयर माइकल ब्लूमबर्ग सामने आ सकते हैं हालांकि उन्होंने राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल होने की बात से इनकार किया है. ये भी संभव है कि रिपब्लिकन पार्टी के लिए नामांकन की दौड़ में शामिल रॉन पॉल निर्दलीय के तौर पर मैदान में उतर सकते हैं.
तीसरा उम्मीदवार भले ही चुनाव न जीते लेकिन वो समीकरण बिगाड़ सकता है क्योंकि वो मुख्य पार्टियों के उम्मीदवार से कुछ वोट अपनी
ओर खींच सकता है.