सोमवार, 24 दिसंबर, 2007 को 06:08 GMT तक के समाचार
थाईलैंड में निर्वासित प्रधानमंत्री तकसिन चिनावट ने चुनावों में जीत का दावा करने के बाद अन्य दलों से सरकार में शामिल होने को कहा है.
इस बात के संकेत हैं कि चिनावट की पीपुल्स पॉवर पार्टी (पीपीपी) 448 सीटों के सदन में 228 सीटें हासिल कर लेगी.
ये स्पष्ट बहुमत 21 सीटों से कम है. इसी वजह से पीपीपी नेता समाक सूनतोरावेट ने सरकार में संभावित साझीदारों को आमंत्रित किया है.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि पिछले साल हुए तख़्ता पलट को देखते हुए ये परिणाम एक बड़ा धक्का है.
सेना के जिन जनरलों ने इस तख़्ता पलट को अंजाम दिया था, वे अपनी सारी कोशिशों के बावजूद चिनावाट की लोकप्रियता को कम करने में नाकाम रहे.
साथ ही वे इस बात को साबित करने के लिए संतोषजनक सबूत नहीं जुटा पाए कि चिनावाट बेहद भ्रष्ट व्यक्ति हैं.
चिनावाट इंग्लैंड के मैंनचेस्टर यूनाइटेड फुटबॉल क्लब के 74 फ़ीसदी के मालिक भी हैं, माना जा रहा है कि अब उनके लिए थाइलैंड वापस जाने का रास्ता साफ़ है.
उनकी पार्टी ने थाईलैंड के ग्रामीण इलाकों में चिनावाट की नीतियों को आधार बनाकर प्रचार किया.
साथ ही उन्होंने चिनावाट को वापस थाईलैंड लाने का भी वादा किया.
चिनावाट की नीतियों में सबको स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाना प्रमुख रहा है.
ग्रामीणों पर असर
थाईलैंड के ज़्यादातर मतदाता ग्रामीण इलाक़ों में ही रहते हैं और उन पर चिनावाट के भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों का कोई असर नहीं दिखाई दिया.
हाँगकाँग से चुनावों पर पैनी नज़र रख रहे चिनावाट ने कहा कि वो नई सरकार गठित होते ही स्वदेश लौट जाएंगे.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इसमें एक महीने का समय लग सकता है क्योंकि पीपीपी के पास अभी सरकार बनाने के लिए पूर्ण बहुमत नहीं है और उसे सत्ता में आने के लिए अन्य पार्टियों के साथ बातचीत करनी होगी.
लेकिन चिनावाट की वापसी पर सेना की क्या प्रतिक्रिया होगी, इसका अंदाजा़ लगाना काफ़ी मुश्किल है.
लेकिन चिनावाट के ख़िलाफ़ राजधानी बैंगकॉक में बसे मध्यम-वर्ग, उच्च स्तरीय नौकरशाहों और बड़े उद्योगपतियों में कड़वाहट अब भी कम नहीं हुई है.
चिनावाट पर भ्रष्टाचार के कई आरोप अब भी मंडरा रहे हैं जिनसे बचने के लिए उन्हें अदालत के चक्कर लगाने ही पड़ेंगे.
लेकिन थाईलैंड के कई लोगों को लगता है कि चिनावाट इस सफलता को सीढ़ी बनाकर राजनीति में वापस ज़रुर लौटेंगे.