बुधवार, 19 दिसंबर, 2007 को 16:32 GMT तक के समाचार
एलेस्टर लॉसन
बीबीसी संवाददाता, न्यूयॉर्क
अमरीका में रहने वाले बांग्लादेशी मूल के एक छात्र को नहीं मालूम था कि जिन रेल मुसाफ़िरों को पिटते देख वह बचाने की कोशिश कर रहा है, उनकी इस मदद के लिए उसे ईनाम भी मिल सकेगा.
उसने तो सिर्फ़ यह सोचा था कि राह चलते लोगों को पिटते देख उनकी मदद करना इंसानियत है और उसने बस यही किया लेकिन इंसानियत का जज़्बा दिखाने के इस मामले ने एक नया मोड़ ले लिया.
दरअसल ट्रेन में पिटते हुए जिन लोगों को उस बांग्लादेशी छात्र ने बचाया था वे यहूदी थे और उनकी मदद करने वाला यह छात्र एक मुस्लिम जिसका नाम है हसन अस्करी.
बस इस यहूदी और मुस्लिम मोड़ ने हसन अस्करी को सुर्ख़ियों में जगह दे दी और उन्हें न्यूयॉर्क के महापौर ने बुधवार को सम्मानित किया.
घटना नौ दिसंबर 2007 की है. हसन अस्करी कहीं जाने के लिए ट्रेन में सवार थे. खचाखच भरे डिब्बे में उन्होंने देखा कि कुछ लोग मिलकर तीन व्यक्तियों को पीट रहे हैं.
दरअसल कुछ कहासुनी के बाद विवाद बढा और लगभग दस लोगों ने तीन यहूदियों को बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया.
आसपास मौजूद लोग तमाशा देख रहे थे लेकिन यहूदियों की मदद के लिए कोई आगे नहीं आ रहा था.
हसन अस्करी को भीड़ की तरह खड़े होकर तमाशा देखना गवारा नहीं था. वह बीच-बचाव के लिए आगे आए. इस प्रयास में उनकी नाक टूट गई, होंठ फट गए और आखों को चोट पहुंची लेकिन वह फिर भी पीछे नहीं हटे.
नायक की उपमा
हसन के बीच-बचाव से हमलावरों का ध्यान इन यहूदियों पर से हटा और पिट रहे यहूदियों में से एक को इसी बीच पुलिस को सूचना देने का मौका मिल गया.
हसन अस्करी ने बीबीसी को बताया, “मैं यह सीखते हुए बड़ा हुआ हूँ कि आप इस तरह की घटना से मुँह चुराकर नहीं भाग सकते.”
उन्होंने कहा, “ मैंने महसूस किया कि मैं यूँ खड़ा होकर मदद करने के बजाय किसी को पिटते नहीं देख सकता. मैं मानता हूँ कि हम सभी एक ही परिवार के सदस्य हैं और मेरे धर्म ने मुझे हमेशा यही सिखाया है कि संकट में इंसान की मदद करनी चाहिए.
इस घटना के बाद से ही हसन अस्करी का पूरे न्यूयॉर्क शहर में जगह-जगह सम्मान किया जा रहा है. इतना ही नहीं ‘द न्यूयॉर्क प्रेस’ ने हसन को ‘नायक’ की उपमा देकर सलाम किया है.
हसन अस्करी का संबंध बांग्लादेश की राजधानी ढाका के एक शाही परिवार से है. उनके तीन पूर्वजों को ब्रिटिश राज में ‘नाइट’ की उपाधि से सम्मानित किया गया था.
हसन की सक्रिय भूमिका की बदौलत पुलिस ने मारपीट में शामिल सभी दस लोगों को हिरासत में ले लिया.
इनमें से तीन को मारपीट और उपद्रव करने के आरोप में अदालत में पेश किया गया.