शुक्रवार, 07 दिसंबर, 2007 को 03:37 GMT तक के समाचार
अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए ने पुष्टि की है कि उसने संदिग्ध अल क़ायदा लड़ाकों से पूछताछ के कम से कम दो वीडियो टेप दो साल पहले नष्ट किए थे. एजेंसी ने माना कि इनमें अहम अल क़ायदा लड़ाकों से पूछताछ की जानकारी थी.
एजेंसी का कहना है कि ऐसा तब किया गया था जब उसके गुप्त क़ैदी शिविर के कार्यक्रम के बारे में जाँच चल रही थी.
अमरीकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी ख़बर के अनुसार इन टेपों में संदिग्ध लोगों से पूछताछ की कठोर प्रक्रिया दिखाई गई थी.
उधर सीआईए का कहना है कि टेप नष्ट करने का मक़सद अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया गया और इसलिए भी किया गया क्योंकि गुप्तचार कार्यों के लिए इनका उस समय कोई महत्व नहीं रह गया था.
यातनाएँ देने का मुद्दा
बीबीसी के वॉशिंगटन संवाददाता का कहना है कि इस ख़बर के बाद सीआईए की हिरासत में 'संदिग्ध आतंकवादियों' को यातनाएँ दिए जाने के मुद्दे पर बहस फिर छिड़ जाने की संभावना है.
उनका कहना है कि इससे ये सवाल भी उठ खड़ा होगा कि क्या सीआईए एजेंटों ने अदालतों के समक्ष और राष्ट्रपति के बनाए आयोग के सामने पूरी जानकारी देने से परहेज़ किया.
बीबीसी के अमरीका के मामलों के संपादक जस्टिन वेब का कहना है कि सीआईए के स्पष्टीकरण को मानवाधिकार गुटों ने ख़ारिज किया है.
उनका कहना है कि सभी सीआईए कर्मचारियों को संबोधित एक पत्र में सीआईए निदेशक माइकल हेयडन ने बताया कि वर्ष 2002 में बनाए गए टेप उस गुप्त पूछताछ का हिस्सा थे जो संदिग्ध अल क़ायदा नेता अबू ज़ुबैदा की गिरफ़्तारी के बाद बनाए गए.
ग़ोरतलब है कि आजकल अमरीकी सुप्रीम कोर्ट ग्वांतानामों बे में क़ैद लोगों से संबंधित उस मुद्दे की सुनवाई कर रहा है जिसमें ये तय होने है कि क्या ये क़ैदी आम अमरीकी अदलतों में अपने मामले रख सकते हैं या नहीं.
ऐसे दो मामले हैं जिन्हें ग्वांतानो में क़ैद 305 में से 37 विदेशी नागरिकों ने दायर किए हैं.
संभावना है कि सुप्रीम कोर्ट वर्ष 2008 के मध्य में इन मामलों पर फ़ैसला सुनाएगा.