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मंगलवार, 04 दिसंबर, 2007 को 19:25 GMT तक के समाचार

मलेशिया: भारतीय मूल के लोगों पर आरोप

मलेशिया में सरकार विरोधी प्रदर्शन करनेवाले 26 भारतीय मूल के लोगों के ख़िलाफ़ एक पुलिसकर्मी की हत्या की कोशिश का मामला दर्ज किया गया है.

हालांकि इन लोगों ने इस मामले में शामिल होने से इनकार किया है.

बचाव पक्ष के वकीलों का कहना है कि अपराध साबित होने पर इन लोगों को 20 वर्ष की क़ैद हो सकती है.

दरअसल मलेशिया की राजधानी कुआलालम्पुर में 25 नवंबर को प्रदर्शन के दौरान एक पुलिसकर्मी को चोटें आईं थीं.

ख़बरों के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने उस पर लोहे के पाइप और ईंटें फेंकीं थीं.

दूसरी ओर भारतीय विदेश मंत्रालय ने सोमवार को भारत में मलेशिया के कार्यवाहक उच्चायुक्त को तलब किया और उन्हें भारत की चिंता से अवगत कराया है.

भारतीय विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने पत्रकारों से बातचीत में कहा,'' भारत में इस मामले को लेकर चिंता का स्तर आपने देखा है... हमने मलेशियाई अधिकारियों को भारतीय चिंता से अवगत करा दिया है.''

विदेश सचिव का कहना था,'' हमें आश्वासन दिया गया है कि वो इस मामले में जो कर सकते हैं, करेंगे और इसे वो अंदरूनी मामला मानते हैं.''

ग़ौरतलब है कि भारतीय मूल के लोगों के साथ हो रहे कथित बुरे बर्ताव का मुद्दा भारतीय संसद में भी उठा था.

भेदभाव का आरोप

मलेशिया में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों का कहना है कि मलेशिया सरकार देश के हिंदू समुदाय के साथ भेदभाव करती है और उसे विकास के अवसरों से वंचित रखा जाता है.

इस 'भेदभाव' के ख़िलाफ़ राजधानी कुआलालम्पुर में हिंदू समुदाय के लोगों ने एक प्रदर्शन किया था जिसमें भारतीय मूल के हज़ारों लोगों ने हिस्सा लिया था.

मलेशिया की पुलिस ने रैली की अनुमति देने से इनकार कर दिया था. पुलिस का कहना था कि ऐसी रैली से देश में सामुदायिक वैमनस्य को बढ़ावा मिलता.

ये पहला मौक़ा है जब मलेशिया के भारतीय मूल के लोगों ने सरकार के ख़िलाफ़ इतना बड़ा अभियान छेड़ा है.

रैली का आयोजन हिंदू राइट्स एक्शन फ़ोर्स नाम के एक संगठन ने किया था.

इस संगठन के नेता उदय कुमार ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि भारतीय मूल के आठ फ़ीसदी को लोगों को किनारे करने की कोशिश की जा रही है.

विभिन्न आरोपों के संबंध में उनका कहना था कि इसको लेकर भारतीय मूल के लोगों में रोष है और ये 'नस्लवाद' से प्रेरित है.