गुरुवार, 29 नवंबर, 2007 को 01:35 GMT तक के समाचार
सऊदी अरब की सरकार का कहना है कि उसने दो सौ आठ संदिग्ध चरमपंथियों को गिरफ़्तार किया है जो तेल प्रतिष्ठानों, धार्मिक नेताओं और सुरक्षा अधिकारियों पर हमले की योजना बना रहे थे.
सऊदी अरब के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता मंसूर अल तुर्की ने इन गिरफ़्तारियों का ब्योरा देते हुए बताया कि किस तरह इस्लामी चरमपंथियों के कई गुटों ने हमलों के बहुत से षड़यंत्र रचे थे.
उन्होंने बताया कि एक गुट पूर्वी प्रांत स्थित तेल प्रतिष्ठान पर हमला करने की योजना बना रहा था, दूसरा धार्मिक नेताओं और सुरक्षा अधिकारियों को निशाना बना रहा था जबकि तीसरा सऊदी अरब में ग़ैर क़ानूनी ढंग से मिसाइलें लाने की कोशिश कर रहा था.
गिरफ़्तार किए गए 30 से भी ज़्यादा लोग इन आतंकवादी गतिविधियों के लिए पैसा दे रहे थे और एक गुट अपनी विचारधारा के प्रचार और प्रसार में लगा था.
ये गिरफ़्तारियां अल क़ायदा के समर्थकों के ख़िलाफ़ छेड़े गए एक अभियान का हिस्सा हैं जिसने वर्ष 2003 में सऊदी अरब में रह रहे विदेशियों पर कई हमले किए थे.
कामयाबी
गृह मंत्रालय के प्रवक्ता मंसूर अल तुर्की ने कहा कि इन गिरफ़्तारियों से साफ़ ज़ाहिर है कि सरकार इस्लामी चरमपंथियों के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई में कामयाब हो रही है.
उन्होंने कहा, " हम हमेशा कहते हैं कि हम अभी उस स्थिति में नहीं पहुंच पाए हैं कि कह सकें कि हमने आतंकवाद का जड़ से सफ़ाया कर दिया है. असल में यह समस्या अल क़ायदा की विचारधारा से पैदा हुई है. इंटरनेट की वजह से और मुश्किल खड़ी होती है. ऐसे लोग हैं जो इस विचारधारा में विश्वास करते हैं और वे सऊदी अरब और दुनिया के अन्य हिस्सों में लोगों को भर्ती करने के लिए इस विचारधारा का इस्तेमाल करते हैं."
अप्रैल में सऊदी सरकार ने 170 चरमपंथियों की गिरफ़्तारी की घोषणा की थी. उनके बारे में भी यही कहा गया था कि वे देश के विभिन्न भागों में अपनी गतिविधियां चला रहे थे.
ऐसी घोषणाओं से एक तरफ़ तो यह दिखाया जाता है कि सुरक्षा बल गंभीर हमलों को विफल करने में कामयाब हो रहे हैं लेकिन दूसरी तरफ़ यह भी ज़ाहिर होता है कि सऊदी अरब में विद्रोह की चिंगारी अभी बुझी नहीं है.