http://www.bbcchindi.com

अमरीका में होगा मध्य पूर्व सम्मेलन

अमरीका ने कहा है कि वह अगले हफ़्ते मध्य पूर्व पर एक सम्मेलन आयोजित कर रहा है जिसका मक़सद फ़लस्तीन देश बनाने के लिए बातचीत का दौर शुरु करना होगा.

वॉशिंगटन के पास एनपोलिस में होने वाले इस सम्मेलन को अमरीकी अधिकारी इसलिए महत्व दे रहे हैं क्योंकि वर्ष 2000 में हुई इसराइल-फ़लस्तीन वार्ता के बाद ये पहली उच्चस्तरीय व्यापक वार्ता होगी.

इस सम्मेलन के लिए फ़लस्तीन के प्रतिनिधियों, इसराइल, सऊदी अरब, सीरिया, संयुक्त राष्ट्र और कुछ अन्य देशों को आमंत्रित किया गया है. लेकिन अमरीका अब भी कोशिश कर रहा है कि अरब देश इस सम्मेलन में अपने प्रतिनिधि भेजें.

महत्वपूर्ण है कि इसराइल के पड़ोसी देशों में केवल मिस्र और जॉर्डन ने इसराइल को मान्यता दी है.

मंगलवार को इसराइल के प्रधानमंत्री एहुद ओल्मर्ट ने मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के साथ बातचीत के बाद कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि अगले साल तक स्थायी शांति समझौता हो सकता है.

द्विपक्षीय बातचीत भी होगी

वर्ष 2000 की मध्य पूर्व वार्ता के बाद हो रहा ये प्रस्तावित सम्मेलन 27 नवंबर को शुरु होगा और अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शॉन मैक्कॉर्मेक का कहना है कि 49 देशों और संस्थाओं को आमंत्रित किया गया है.

घोषणा की गई है कि सम्मेलन से पहले 26 नवंबर को राष्ट्रपति बुश फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास और इसराइली प्रधानमंत्री एहुद ओल्मर्ट से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे.

लेकिन इसराइल के अहम अरब पड़ोसी देश इस सम्मेलन में अपने प्रतिनिधियों के भेजने के बारे में प्रतिबद्धता जताने से बच रहे हैं.

काहिरा में शुक्रवार को अरब देशों के विदेश मंत्री बैठक कर अपने रवैए के बारे में विचार करेंगे, चाहे हर देश की सरकार अलग तौर पर फ़ैसला करेगी कि उसे इस सम्मेलन में अपना प्रतिनिधि भेजना है या नहीं.

मिस्र के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें भरोसा है कि अमरीका अब एक गंभीर शांति प्रक्रिया शुरु करने के बारे में प्रतिबद्ध है और मिस्र के विदेश मंत्री इसमें भाग लेंगे.

पर्यवेक्षकों का मानना है कि सऊदी अरब समेत अरब देशों का मानना है कि इसराइल ने शांति कायम करने के लिए पर्याप्त रियायतें देने का आश्वासन नहीं दिया है.