सोमवार, 12 नवंबर, 2007 को 09:22 GMT तक के समाचार
बारबरा प्लैट
बीबीसी संवाददाता, इस्लामाबाद
राष्ट्रमंडल के सदस्य देशों के विदेश मंत्री लंदन में मिल कर इस बात पर चर्चा करने वाले हैं कि क्या राष्ट्रमंडल से पाकिस्तान की सदस्यता ख़त्म कर दी जाए.
राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के इमरजेंसी लागू करने के ऐलान के बाद यह बैठक आयोजति करने का इरादा किया गया.
वैसे रविवार को जनरल मुशर्रफ़ ने अपने आलोचकों को यह कह कर तसल्ली देने की कोशिश की है कि चुनाव निर्धारित समय पर ही होंगे. हालाँकि उन्होंने इसके बारे में कुछ नहीं कहा कि इमरजेंसी कब हटाई जाएगी.
समझा जा रहा है कॉमनवेल्थ विदेश मंत्रियों की बैठक मुशर्रफ़ पर पहले से ही डाले जा रहे अंतरराष्ट्रीय दबाव में इज़ाफ़ा करेगी.
पाँच साल का निष्कासन
जनरल मुशर्रफ़ ने जब 1999 में नवाज़ शरीफ़ का तख्त पलट कर सत्ता पर क़ब्ज़ा किया था तब पाकिस्तान को पाँच साल के लिए कॉमनवेल्थ से निकाल दिया गया था.
पाकिस्तान में जब से आपातस्थिति लागू हुई है, मुशर्रफ़ पर लगातार अमरीका और ब्रिटेन से दबाव पड़ रहा है कि वह संविधान बहाल करें और लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं की धरपकड़ बंद करें.
लेकिन रविवार को एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने अपने आलोचकों को मुँहतोड़ जवाब दिया.
उन्होंने चुनाव तो समय पर कराने की घोषणा की लेकिन इमरजेंसी के बारे में उन्होंने कोई खेद ज़ाहिर नहीं किया और कहा कि इस्लामी चरमपंथियों का मुक़ाबला करने के लिए उसकी ज़रूरत है.
मुशर्रफ़ ने यह संकेत भी दिया कि चुनाव के दौरान भी इमरजेंसी लागू रह सकती है.
जनरल मुशर्रफ़ ने पत्रकारों से कहा कि आलोचना के बावजूद उनके पश्चिमी मित्रों ने यह दिखाया है कि वे पाकिस्तान के ज़मीनी हालात को समझते हैं.
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक एक नया सुप्रीम कोर्ट उनके राष्ट्रपति पद पर स्वीकृति की मोहर नहीं लगा देता, वह सेनाध्यक्ष का पद नहीं छोड़ेंगे.
उन्होंने इमरजेंसी के तहत बर्ख़ास्त किए गए तीन जजों को भी बहाल करने से इनकार कर दिया.
मुशर्रफ़ का कहना था कि वे जज उनके कार्यकाल को अंसाविधानिक क़रार दे कर लोकतंत्र को पटरी से उतार सकते थे.