शनिवार, 10 नवंबर, 2007 को 09:26 GMT तक के समाचार
ब्रिटेन में रह रहे भारतीय मूल के डाक्टरों ने अपनी आव्रजन स्थिति को लेकर एक अहम अपील में जीत हासिल की है.
इस अपील के बाद अब ब्रिटेन की पोस्ट ग्रेजुएट ट्रेनिंग नौकरियों में दुनिया के बाकी हिस्सों से आने वाले मेडिकल ग्रेजुएट मेरिट के आधार पर हिस्सा ले सकेंगे.
इसका मतलब है कि हाईली स्किल्ड माइग्रेंट प्रोग्राम यानी एचएसएमपी वीज़ा पर ब्रिटेन आने वाले डॉक्टरों को पोस्ट ग्रेजुएट ट्रेनिंग के लिए ब्रितानी और यूरोपीय संघ के नागरिकों के समान अधिकार मिलेगा.
ब्रिटेन में पहने वाले भारतीय मूल के चिकित्सक इसे अपने लिए एक बड़ी सफलता मान रहे हैं लेकिन ब्रिटेन के स्वास्थ्य विभाग ने इसपर निराशा जताई है.
विभाग ने कहा है कि उन्हें खेद है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवाओं के अंतर्गत काम करने वाले विदेशों से आए डाक्टरों के ट्रेनिंग कार्यक्रम को कठिन बनाने के लिए जो दिशानिर्देश तैयार किए गए थे, उन्हें गैरकानूनी क़रार दे दिया गया है.
विवाद
ग़ौरतलब है कि दुनिया भर से हज़ारों डाक्टर हाईली स्किल्ड माइग्रेंट प्रोग्राम के तहत इस आस में इंग्लैंड आते हैं कि पोस्ट ग्रेजुएट ट्रेनिंग कार्यक्रमों के ज़रिए उन्हें और बेहतर काम और पद का अवसर मिलेगा.
लेकिन इस बारे में रुकावट डालता है ब्रिटेन के स्वास्थ्य विभाग का यह कहना कि पोस्ट ग्रेजुएट कार्यक्रम के लिए बाहरी डॉक्टरों का चयन तभी होगा जब उनके पास ब्रिटेन या यूरोपीय संघ का कोई स्नातक उपलब्ध नहीं होगा.
ब्रितानी हाईकोर्ट ने इसे ठुकराते हुए कहा है कि एचएसएमपी वीज़ा धारकों को बराबरी के दर्जे पर प्रतियोगी बनाया जाना चाहिए.
इस पूरे मामले को ब्रिटेन के हाईकोर्ट ले जाने वाले डॉक्टर सतीश मैथ्यू ने कहा है कि वो इस फ़ैसले से बेहद खुश हैं.
उन्होंने कहा कि विदेशों से आ रहे डॉक्टरों के साथ स्वास्थ्य विभाग ने जो बर्ताव किया वह बेहद अन्यायपूर्ण था.