शुक्रवार, 26 अक्तूबर, 2007 को 23:29 GMT तक के समाचार
लातिन अमरीकी क्रांतिकारी अर्नेस्तो चे ग्वेरा के बालों को सीआईए के एक पूर्व अधिकारी ने 1,19,000 डॉलर यानी कोई 50 लाख रुपयों में नीलाम किया है.
इसे ख़रीदने वाला ह्यूस्टन का एक पुस्तक विक्रेता है और वह नीमाली में अकेला बोली लगाने वाला था.
अमरीकी शहर डलास में हुई इस नीलामी का चे ग्वेरा की विधवा और उनके समर्थकों ने विरोध किया है.
हेरिटेज ऑक्शन गैलेरीज़ की ओर से की जाने वाली यह इस तरह की पहली नीलामी नहीं थी. इससे पहले इसी संस्था ने अब्राहम लिंकन, एल्विस प्रेस्ली और मर्लिन मनरो के सर के बालों को भी बेचा था.
बालों के साथ चे ग्वेरा के मृत शरीर की फ़ोटो और 1967 में बोलिविया में उनको गोली मार देने के बाद लिए गए उंगलियों के निशान भी नीलामी के लिए रखे गए थे.
चे ग्वेरा के सिर से आठ सेंटीमीटर लंबे बाल ख़रीदने वाले 61 वर्षीय बिल बटलर ने टेलीफ़ोन पर बोली लगाई थी.
बिल बटलर का कहना है कि वे चे ग्वेरा के बालों को अपनी दुकान में लोगों के देखने के लिए रखेंगे.
इस नीलामी से पहले हेरिटेज ऑक्शन गैलेरीज़ ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी क्योंकि आयोजकों को शक था कि चे ग्वेरा के समर्थक विरोध कर सकते हैं कि क्रांतिकारी की मौत से भी पैसे बनाए जा रहे हैं.
प्रतीक पुरुष
चे ग्वेरा को वामपंथी आंदोलन का प्रतीक पुरुष माना जाता है जबकि उनका विरोध करने वालों का कहना है कि उन्होंने अपने विरोधियों को बेरहमी से मारा.
अर्नेस्तो चे ग्वेरा पैदा हुए थे अर्जेंटीना में और बाद में वे क्यूबा गुरिल्ला युद्ध के नेता बन गए.
39 साल के चे ग्वेरा को अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए के समर्थन वाली बोलिवियाई सेना की एक टुकड़ी ने पकड़ा था और 9 अक्तूबर 1967 को गोली मार दी गई थी.
क्यूबा में पैदा हुए सीआईए के पूर्व एजेंट गुस्तावो विलोल्डो की निगरानी में चे ग्वेरा की अंत्येष्टि हुई थी. उसी समय उन्होंने चे ग्वेरा के सिर के कुछ बाल काट लिए थे, उनकी फ़ोटो खींची थी और मिशन पूरा हो जाने की निशानी के तौर पर उनकी उंगलियों के निशान भी ले लिए थे.
और अब ये सब चीज़ें नीलामी के लिए उपलब्ध थीं.
नीलाम करने वाले टॉम स्लैटर का कहना है कि इस समय चे ग्वेरो जिस तरह से लोगों को हीरो बने ङए हैं वह गुस्तावो विलोल्डो को नहीं भाता.
उनका कहना है, "गुस्तावो विलोल्डो मानते हैं कि चे ग्वेरा एक हत्यारे और डाकू थे और उन्हें पकड़कर मार देना तर्कसंगत था."
गुस्तावो को यह बिल्कुल पसंद नहीं कि चे ग्वेरा अब राजनीतिक प्रतीक बन गए हैं और वे पूरी कहानी बताने के लिए आतुर हैं.