बुधवार, 24 अक्तूबर, 2007 को 11:10 GMT तक के समाचार
अफ़ग़ानिस्तान में नैटो के सैन्य अभियान पर चर्चा करने के लिए अमरीका और उसके सहयोगी देशों के वरिष्ठ रक्षा अधिकारी नीदरलैंड में मिल रहे हैं.
अमरीका का नैटो के सहयोगी देशों पर अतिरिक्त सैनिक भेजने का दबाव और इराक़-तुर्की सीमा पर पैदा हुए तनाव के मुद्दे इस वार्ता में छाए रहेंगे.
अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान चरमपंथियों से लड़ रही नैटो सेना में अमरीका के लगभग 35 हज़ार सैनिक हैं जो कि कुल सेना का क़रीब आधा हिस्सा है.
तुर्की संकट
नैटो गठबंधन में तुर्की की सेना यूरोप में सबसे बड़ी है और वो उत्तरी इराक़ में कुर्द अलगाववादियों के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई करने के लिए तैयार बैठी है.
नैटो के वरिष्ठ अधिकारी नीदरलैंड में नूर्दविक में एकत्र हो रहे हैं. इराक़-तुर्की संकट पर चर्चा पहले इस बातचीत में शामिल नहीं थी.
इराक के अन्य भागों की तुलना में कुर्दों के बहुमत वाला उत्तरी इलाक़ा कुछ शांत है और इसे देखते हुए अमरीका और तुर्की के सहयोगियों ने संयम बरतने की अपील की है.
बीबीसी के रक्षा संवाददाता रॉब वॉटसन के अनुसार तालेबान को सत्ता से हटाने के छह वर्ष बाद अफ़ग़ानिस्तान में नैटो अभियान को लेकर चिंता का माहौल है.
तालेबान चरमपंथी अपना संगठन दोबारा से मज़बूत करने में जुटे हुए हैं लेकिन नैटो सेना में उम्मीद के अनुसार इज़ाफ़ा नहीं हुआ है. इस कारण से नैटो सहयोगियों के बीच मतभेद पैदा हो गए हैं.
नैटो अभियान
अमरीका के रक्षा मंत्री राबर्ट गेटस ने इस सप्ताह की शुरूआत में कहा था, "मैं इससे संतुष्ट नहीं हूँ कि जिस गठबंधन के पास 20 लाख से अधिक सैनिक, नौसैनिक और वायुसैनिक हों, उसके सदस्य अफ़ग़ानिस्तान में वायदे के मुताबिक कुछ अतिरक्त संसाधन नहीं भेज सकता."
अफ़ग़ानिस्तान में कितने सैन्य बल का इस्तेमाल किया जाए इसे लेकर मतभेद हैं और कुछ सरकारों पर अभियान से अपने सैनिकों को हटाने का दबाव है.
संभावना है नैटो के सहयोगी देशों के रक्षा अधिकारियों को अफ़ग़ानिस्तान में अतिरिक्त सैनिक भेजने के लिए कहा जाए. लेकिन इसका कारण अफ़ग़ानिस्तान में लड़ाकू अभियानों से ज़्यादा वहाँ सुरक्षा बलों को प्रशिक्षण देना हो सकता है.
अफ़ग़ानिस्तान से पश्चिमी देशों के सैनिकों को हटाने से पूर्व वहाँ सुरक्षा बलों में सुधार को काफ़ी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
बीबीसी संवाददाता के अनुसार नैटो के अधिकारी मानते हैं कि रणनीति को लेकर मतभेद हो सकते हैं लेकिन सभी सदस्य सहमत हैं कि अफ़ग़ानिस्तान में नाकामी कोई विकल्प नहीं है.