रविवार, 21 अक्तूबर, 2007 को 23:23 GMT तक के समाचार
इराक़ सीमा पर कुर्द विद्रोहियों से हुए संघर्ष में कई सैनिकों और कुर्दों की मौत के बाद बुलाई गई आपात बैठक में कहा गया है कि तुर्की अपनी सीमा पर किसी भी तरह के आतंकवाद को मदद देना गवारा नहीं करेगा.
रिपोर्टों के अनुसार कहा जा रहा है कि तुर्की के दस से अधिक सैनिक कुर्दिस्तान वरकर्स (पीकेके)पार्टी के विद्रोहियों के छापामार हमले में मारे गए.
संघर्ष में 30 से अधिक लड़ाके भी मारे गए हैं.
इस हमले के बाद रविवार को दिनभर तुर्की में माहौल तनावपूर्ण रहा और राजनीतिक पारा चढ़ा रहा.
सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने के लिए आपात बैठक बुलाई थी जो ढाई घंटे तक चली. लेकिन इसके अंत में सिर्फ़ एक बयान जारी किया गया, जिसमें शब्द तो कठोर इस्तेमाल किए गए थे लेकिन साफ़ साफ़ बहुत कुछ नहीं कहा गया.
बयान में कहा गया है कि तुर्की इराक़ की सम्प्रभुता का सम्मान करता है लेकिन आतंकवाद को किसी भी तरह की मदद दिया जाना उसे गवारा नहीं है. तुर्की अपनी एकता और अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए कोई भी क़ीमत चुकाने को तैयार है.
तुर्की का आरोप है कि उत्तरी इराक़ में पीकेके के तीन हज़ार से ज़्यादा लड़ाके जमे हुए हैं. उन्हें इराक़ी कुर्दों की ओर से मदद नहीं भी मिलती हो, बरदाश्त ज़रूर किया जाता है.
कुछ देर ही बाद प्रधानमंत्री एरदोगान ने जो कहा उससे लगा कि उत्तरी इराक़ पर एकदम हमला नहीं बोला जाएगा, हालाँकि फ़ौज और आम जनता की ओर से युद्ध करने के लिए ज़बरदस्त दबाव बनाया गया है. प्रधानमंत्री ने कहा कि अमरीकी विदेशमंत्री कोंडलीज़ा राइस ने तुर्की से कुछ दिन तक इंतज़ार करने को कहा है.
तुर्की के सैनिकों पर कल हुए हमले से चार दिन पहले ही तुर्की की संसद ने इराक़ की सीमा में घुसकर पीकेके छापामारों पर हमला बोलने का अनुमोदन कर दिया था.
इस पर इराक़ी कुर्द इलाक़े के नेता मसूद बरज़ानी ने कहा है कि तुर्की के हमले की सूरत में वो अपने इलाक़े की सुरक्षा करेंगे.
उन्होंने पीकेके को आतंकवादी संगठन बताने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा '
अगर तुर्की एक शांतिपूर्ण हल का प्रस्ताव रखता है और PKK उसे ख़ारिज कर देता है, उस सूरत में हम उन्हें आतंकवादी कहेंगे. लेकिन अभी नहीं.'
इराक़ के राष्ट्रपति जलाल तालेबानी ने बारह तुर्क फ़ौजियों की मौत पर अफ़सोस ज़ाहिर किया है. वो ख़ुद कुर्द हैं और कल उन्होंने उत्तरी इराक़ के कुर्द नेताओं के साथ बातचीत की.
तालेबानी ने पीकेके के कुर्द छापामारों से हथियार डाल देने को कहा ' हमने PKK से लड़ाई बंद करने की अपील की है और कहा है कि वो ख़ुद को एक नागरिक और राजनीतिक संगठन में बदल दें. लेकिन अगर वो लड़ाई जारी रखेंगे तो उन्हें इराक़ी कुर्दिस्तान छोड़ देना चाहिए और वहाँ समस्या खड़ी नहीं करनी चाहिए. वो अपने मुल्कों में लौट जाएँ और जो चाहे करें.'
इराक़ के लिए ये वाक़ई मुश्किल घड़ी है. वो तुर्की को मदद तो करना चाहता है लेकिन पीकेके को रोकने में क़तई कामयाब नहीं है. इराक़ इन हमलों की आलोचना चाहे कितने ही कड़े शब्दों में करे – तुर्की अब ख़ुश होने वाला नहीं है.