शनिवार, 20 अक्तूबर, 2007 को 15:17 GMT तक के समाचार
पूर्व सोवियत संघ के आख़िरी राजनीतिक नेता मिखाइल गोर्बोचेफ़ ने रूस में सामाजिक सुधारों और भ्रष्टाचार उन्मूलन के लिए अब एक आंदोलन शुरू किया है.
मिखाइल गोर्बोचेफ़ को सोवियत संघ का आख़िरी नेता कहा जाता है क्योंकि उनके समय तक सोवियत संघ का विघटन हो चुका था और उसके अनेक प्रांत अलग होकर स्वतंत्र देश अलग हो गए थे.
अपने इस आंदोलन को गोर्बाचेफ़ ने यूनियन ऑफ़ सोशल-डेमोक्रेट्स नाम दिया और इस संगठन के पहले सम्मेलन में उन्होंने मिशन बताते हुए कहा कि पार्टी मक़सद देश में लोगों की 'नकारात्मक प्रवृत्तियाँ और भ्रष्टाचार' का मुक़ाबला करना है.
मिखाइल गोर्बोचेफ़ ने कहा कि रूस में सुधार लाने के प्रयासों में वह राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का समर्थन करते हैं.
रूस में दिसंबर 2007 में आम चुनाव प्रस्तावित हैं और संभावना जताई जा रही है कि ये चुनाव यूनाइटेड रूस पार्टी जीत लेगी. इस पार्टी को राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का समर्थन हासिल है.
गोर्बोचेफ़ ने अपनी नई पार्टी के लगभग 200 प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा, "हम ताक़त के लिए संघर्ष करेंगे लेकिन सिर्फ़ ऐसी ताक़त के लिए जो लोगों को दिमाग़ों को बदल सके."
उन्होंने कहा कि पार्टी जिन प्रमुख मुद्दों पर आंदोलन चलाएगी उनमें ठोस राजनीतिक बहस की कमी, ग़ैरसरकारी संगठनों पर बढ़ रहे दबाव और दानव की तरह फैलते भ्रष्टाचार शामिल होंगे.
गोर्बाचेफ़ की पार्टी की तरफ़ से जारी एक वक्तव्य में कहा गया है कि स्वतंत्र लोकतांत्रिक विकल्पों और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विदा की बहुत कमी है.. इसीलिए सामाजिक और लोकतांत्रिक सोच वाले लोग स्वतंत्रता और निष्पक्षता के मूल्यों के लिए संघर्ष करने के वास्ते एकजुट हो रहे हैं.
मिखाइल गोर्बोचेफ़ ने 1980 के दशक के आख़िरी दौर में सोवियत संघ में राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था में व्यापक सुधार शुरू किए थे जिनके परिणामस्वरूप वहाँ मार्क्सवादी व्यवस्था का ख़ात्मा हो गया था.