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शनिवार, 13 अक्तूबर, 2007 को 23:22 GMT तक के समाचार

'इराक़ में भ्रष्टाचार का बोलबाला'

इराक़ के भ्रष्टाचार निरोधी विभाग के प्रमुख रहे एक अधिकारी ने आरोप लगाया है कि इराक़ में सरकार ने कम से कम 18 अरब डॉलर का घपला किया है.

बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में ये आरोप लगाते हुए राधी हम्ज़ा अल राधी ने कहा कि उनके आयोग ने ऐसे तीन हज़ार मामलों के सबूत इकट्ठे किए हैं.

लेकिन उनका कहना है कि उनके कई क़रीबियों की हत्या के बाद उन्होंने इराक़ छोड़कर अमरीका में शरण लेना बेहतर समझा.

राधी हम्ज़ा अल राधी को इराक़ को भ्रष्टाचार मुक्त करने का ज़िम्मा सौंपा गया था.

लेकिन उनका कहना है कि ये करने की कोशिश में उनकी जान ही ख़तरे में पड़ गई.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, '' हमने अपना काम जून, 2004 में शुरू किया था और हमारे आयोग का नाम था ' इराक़ कमिशन ऑन पब्लिक इंटेग्रिटी'. हमने तीन हज़ार मामलों की छानबीन शुरू की. ये मामले इराक़ के अलग अलग इलाक़ों के थे और हमने पाया कि लगभग 18 अरब डॉलर का कोई हिसाब नहीं था.''

'कार्रवाई नहीं'

राधी हम्ज़ा ने आरोप लगाया कि इतने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के बावजूद इराक़ सरकार ने कार्रवाई करने की कोई जल्दी नहीं दिखाई.

इराक़ के पूर्व भ्रष्टाचार निरोधी विभाग के प्रमुख अल राधी कहते हैं कि उल्टा उनकी और उनके करीबी सहयोगियों की मुश्किलें बढ़ गईं.

वो कहते हैं,'' जब मेरी सुरक्षा का मुख्य सहायक अपनी गर्भवती पत्नी को जाँच के लिए क्लीनिक गया तो उसे और उसकी पत्नी दोनों को मार डाला गया. एक दूसरे मामले में मेरे अंगरक्षक के पिता का अपहरण हो गया. कुछ दिनों बाद उनका शव हमें मिला.''

इसी महीने की शुरुआत में अल राधी ने अमरीकी संसदीय समिति के सामने कहा था कि प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी ने भ्रष्टाचार में लिप्त अपने कुछ रिश्तेदारों को बचाया था और कुछ मंत्रियों को भी अपने क़रीबियों को बचाने दिया था.

लेकिन दूसरी ओर इराक़ के प्रधानमंत्री कार्यालय ने अल राधी पर चरित्र हनन का मामला दायर करने की धमकी दी है.