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बुधवार, 10 अक्तूबर, 2007 को 09:11 GMT तक के समाचार

'इराक़ की स्थिति प्रेशर कुकर जैसी'

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी ने चेतावनी दी है कि इराक़ की स्थिति एक प्रेशर कुकर के जैसी बनती जा रही है जहाँ कई प्रांतों में दूसरी जगहों से विस्थापित होकर आए लोगों को शरण नहीं दी जा रही है.

संयुक्त राष्ट्र संस्था की इराक़ इकाई के प्रमुख एंड़्रयू हार्पर ने बीबीसी के साथ एक बातचीत में कहा कि स्थानीय अधिकारी समस्या की गंभीरता का सामना नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि उनके पास शरणार्थियों की व्यवस्था करने के लिए साधन नहीं हैं.

उन्होंने कहा, "यहाँ ऐसे प्रांत हैं जहाँ लोगों को या तो सीधे-सीधे अपनी सीमा में नहीं घुसने दिया जा रहा है और वो आते हैं तो उनको खाने का सामान नहीं दिया जा रहा है या फिर ऐसे शरणार्थियों को अपने प्रांत में शिक्षा देने से दूर रखकर उनपर दबाव डाला जा रहा है कि वे वहाँ से कहीं और जाएँ."

एंड़्रयू हार्पर ने ये भी कहा कि उनकी संस्था ने इराक़ सरकार के सामने इस समस्या को उठाया है.

इराक़ में विस्थापितों की संख्या दुनिया में विस्थापितों की सबसे बड़ी संख्या है और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग के अनुसार क़रीब 22 लाख इराक़ी अपने ही देश में विस्थापित हुए हैं.

उच्चायोग का यह भी कहना है कि 2003 में अमरीकी नेतृत्व वाले विदेशी हमले के बाद लगभग 22 लाख ही इराक़ी अपने पड़ोसी देशों में चले गए हैं जिनमें सीरिया और जॉर्डन प्रमुख हैं.

संयुक्त राष्ट्र अधिकारी का कहना है कि इन चालीस लाख इराक़ी विस्थापितों का संकट उनकी संस्था और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए अभी सबसे बड़ा संकट है. उनका कहना है कि ये संकट बढ़ता ही जा रहा और हर महीने औसतन एक लाख और लोग इस संख्या में जुटते जा रहे हैं.

एंड्रयू हार्पर का कहना है कि अभी सबसे ज़रूरी है कि ऐसे लोगों के लिए भोजन, आश्रय और चिकित्सा की व्यवस्था की जाए लेकिन सुरक्षा की हालत को देखते हुए सबकुछ व्यवस्थित करना बहुत ही मुश्किल काम है.

संयुक्त राष्ट्र अधिकारी ने इराक़ की स्थिति पर ये टिप्पणी ऐसे समय की है जब इराक़ के पड़ोसी राष्ट्रों ने इराक़ी लोगों को अपने यहाँ आने से रोकने के लिए अपनी सीमाएँ बंद करने का फ़ैसला किया है.