शुक्रवार, 05 अक्तूबर, 2007 को 15:06 GMT तक के समाचार
हरिंदर मिश्रा
यरूशलम से
फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने अमरीका से विशेष आग्रह किया है कि नवंबर के मध्य-पूर्व शांति सम्मेलन में भारत को भी आमंत्रित किया जाए.
फ़लस्तीनी राष्ट्रपति के प्रवक्ता मोहम्मद अदवान ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा, "भारत फ़लस्तीनियों के लिए एक महत्वपूर्ण राष्ट्र है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में उसकी एक अलग पहचान है. इस सम्मेलन में भारत की हिस्सेदारी पूरी प्रक्रिया के लिए व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने में मदद करेगी".
पिछले महीने भारत के मध्य-पूर्व मामलों विशेष दूत चिन्मय गरेखान के साथ मुलाक़ात के दौरान फ़लस्तीनी राष्ट्रपति अब्बास ने कहा था कि भारत के इसराइल के साथ अच्छे संबंध और फ़लस्तीनियों के साथ ऐतिहासिक संबंध मध्य-पूर्व शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मददगार साबित हो सकते हैं.
फ़लस्तीनी सूचना मंत्री रियाद अल-मलिकी ने पश्चिमी तट के रामल्लाह शहर में पत्रकारों को सम्बोधित करते कुए कहा है कि अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश इस सम्मेलन के लिए क्वाटर्रेट (चौकड़ी), जी-8 समूह के राष्ट्र, सुरक्षा परिषद् के स्थायी सदस्यों, अरब लीग के राष्ट्रों और तीन मुस्लिम बहुल राष्ट्रों को आमंत्रित करना चाहते हैं.
चौकड़ी के चार सदस्य हैं--संयुक्त राष्ट्र, रूस, यूरोपीय संघ और अमरीका.
तीन अहम मुस्लिम बहुल राष्ट्रों में तुर्की, मलेशिया और इंडोनेशिया को शामिल किया गया है जिससे इस्लामी दुनिया में भी इस प्रक्रिया के लिए समर्थन जुटाया जा सके.
अल-मलिकी ने कहा कि फ़िलहाल इसराइली और फ़लस्तीनी प्रशासन एक संयुक्त बयान जारी करने पर काम करेंगे जो कि नवंबर के सम्मेलन के बाद शांति प्रक्रिया आगे बढ़ाने की रुपरेखा प्रस्तुत करेगा.
उन्होंने कहा कि सम्मेलन के बाद संयुक्त बयान पर फ़लस्तीनी प्रशासन जनमत संग्रह करवाएगी और अगर जनता ने इसे मंज़ूर कर लिया तो उसके बाद फ़लस्तीनी प्रशासन दबाव डालेगा कि छह महीने के अंदर इसे अमल में लाया जाए.