बुधवार, 03 अक्तूबर, 2007 को 23:20 GMT तक के समाचार
अमरीका ने उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को निष्क्रिय बनाने वाले अंतरराष्ट्रीय समझौते का स्वागत किया है.
यह समझौता छह देशों के बीच उत्तर कोरिया की राजधानी प्यॉंगयांग में हुआ जिसमें उत्तर कोरिया, अमरीका, रूस और चीन शामिल थे.
इसके बदले अमरीका, उत्तर कोरिया को ईंधन देने को तैयार हो गया है और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों की सूची में से उसका नाम हटाने की भी कोशिश करेगा.
राष्ट्रपति बुश ने कहा कि उत्तर कोरिया के साथ जो समझौता हुआ है उससे साफ़ ज़ाहिर है कि वह अपना परमाणु कार्यक्रम बंद करने के प्रति वचनबद्ध है और इससे उस समूचे क्षेत्र की शांति सुरक्षित हो सकेगी.
उत्तर कोरिया इस साल के अंत तक यॉंग ब्यॉंग स्थित अपने परमाणु रिएक्टर को अक्षम करने के लिए सहमत हो गया है.
अमरीका के मुख्य वार्ताकार क्रिस्टोफ़र हिल ने कहा कि यह उन कई क़दमों में से एक है जिसे उठाने को उत्तर कोरिया तैयार हुआ है.
अब एक अमरीकी दल को उस परमाणु संयंत्र में जाकर काम करने की अनुमति की ज़रूरत पड़ेगी.
जिन छह देशों के बीच समझौता हुआ है उन्होंने अमरीका से अपने दल को उत्तर कोरिया भेजने को कहा है.
अमरीका के मुख्य वार्ताकार क्रिस्टोफ़र हिल का कहना था,'' मेरे विचार में हम जल्दी से जल्दी वहां जाना चाहेंगे, शायद अगले सप्ताह ही, जिससे यॉंग ब्यॉंग के संयंत्र को अक्षम कर सकें.''
उत्तर कोरिया सहमत
इसी यॉंग ब्यॉंग परिसर में उत्तर कोरिया ने वह सामग्री तैयार की थी जिसका परीक्षण उसने पिछले साल करके अपनी परमाणु क्षमता का परिचय दिया था.
उत्तर कोरिया अपने अन्य परमाणु कार्यक्रमों की पूरी सूची देने को भी तैयार हो गया है.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण होगा परमाणु हथियारों का समर्पण जो अगले साल से शुरु होगा और बहुत से विशेषज्ञों का मानना है कि यही सबसे बड़ी चुनौती साबित होगा.
उत्तर कोरिया को इस सहयोग के बदले आर्थिक सहायता मिलेगी.
अमरीकी प्रशासन ने यह वादा भी किया है कि वह उत्तर कोरिया का नाम अमरीका की उस सूची से हटाने का प्रयास करेगा जिसमें आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों के नाम हैं.
हालांकि यह अब भी काफ़ी संवेदनशील मामला है और इससे पहले उत्तर कोरिया को बहुत कुछ करना होगा.