सोमवार, 01 अक्तूबर, 2007 को 08:28 GMT तक के समाचार
संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत इब्राहिम गम्बारी ने एक बार फिर बर्मा की सैनिक सरकार के शीर्ष कमांडरों से बातचीत की कोशिशें तेज़ कर दी है.
बर्मा के मुख्य शहर रंगून में हज़ारों की संख्या में सैनिक गश्त लगा रहे हैं. सरकार के ख़िलाफ़ कोई नया प्रदर्शन नहीं हुआ है.
इस बीच लोकतंत्र की बहाली की माँग कर रहे प्रदर्शनाकरियों पर सेना की ज़्यादतियों के नए विवरण सामने आ रहे हैं.
इससे पहले रविवार को गम्बारी ने हिरासत में रखी गईं लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सान सू ची से मुलाक़ात की थी.
रंगून स्थित एक संवाददाता का कहना है कि लोग सैनिकों की तैनाती से सहमें हुए हैं. लोगों का कहना है कि सुरक्षा बल बौद्ध भिक्षुओं, महिलाओं और बच्चों को भी निशाना बना सकते हैं.
दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के संगठन आसियान ने सैनिक सरकार को चिट्ठी लिखी है जिसमें कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ बल प्रयोग का विरोध किया जाना चाहिए.
आसियान ने सोमवार को यह पत्र जारी किया. इसमें कहा गया है कि बर्मा में जो भी हुआ है उसकी तस्वीरें देख कर दुनिया सन्न रह गई.
व्यापक सैन्य तैनाती
बर्मा के सबसे बड़े शहर रंगून में तनाव है और सैकड़ों हथियार बंद सैनिक और पुलिस के जवान सड़कों पर गश्त कर रहे हैं.
एक पखवाड़े में ये पहला मौक़ा है कि रंगून की सड़कों पर सरकार के विरोध में कोई बड़ा प्रदर्शन नहीं हुआ. इसकी पीछे एकमात्र कारण है सेना की भारी तैनाती.
रंगून के आसपास के इलाक़ों की नाकाबंदी कर दी गई है, वहाँ सैकड़ों की संख्या में हथियार बंद सुरक्षाकर्मियों को तैनात रखा गया है.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सुरक्षाकर्मी लोगों को रोकते हैं, उन्हें हाथ पीछे कर घुटनों के बल बैठने कहते हैं और फिर उनकी तलाशी ली जाती है.
रविवार को रंगून की लगभग आधी दुकानें खुली हुई थीं, लेकिन ख़रीददारों से कहीं ज़्यादा संख्या में सुरक्षाकर्मी दिख रहे थे.
ऐसी भी ख़बरें हैं कि हिरासत में लिए गए भिक्षु अनशन कर रहे हैं. वे सैनिकों का दिया खाना खाने से मना कर रहे हैं.