मंगलवार, 25 सितंबर, 2007 को 06:08 GMT तक के समाचार
बर्मा में अधिकारियों ने रंगून में शाम से सुबह तक का कर्फ़्यू लगा दिया है. रंगून में कई जगह सेना को तैनात कर दिया गया है.
वहाँ बौद्ध भिक्षुओं के नेतृत्व में पिछले सप्ताह से प्रदर्शन हो रहे हैं.
बौद्ध भिक्षु सैन्य शासन समाप्त कर लोकतंत्र की स्थापना की माँग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं और अब आम लोग भी इन प्रदर्शनों से जुड़ रहे हैं.
सैनिक शासन के ख़िलाफ़ पिछले 20 वर्षों में यह सबसे बड़ा और व्यापक प्रदर्शन है.
दिन में अधिकारी शहर में घूम-घूमकर लाउडस्पीकरों के जरिए लोगों को आगाह करते रहे कि वे विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा न लें.
चेतावनी
सरकारी मीडिया ने बौद्ध भिक्षुओं से अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त करने और राजनीति से दूर रहने को कहा था.
लेकिन प्रदर्शनों के पीछे जिस संगठन का हाथ है, वो भूमिगत है और उसका कहना है कि वह विरोध प्रदर्शन जारी रखेगा.
बर्मा के पड़ोसी देश थाईलैंड से बीबीसी संवाददाता जोनाथन हैड का कहना है कि कुछ दिनों की चुप्पी और हिचकिचाहट के बाद बर्मा के सैन्य शासकों ने प्रदर्शनों के ख़िलाफ़ कार्रवाई का मन बना लिया है.
सरकारी मीडिया ने मंगलवार की सुबह अपने प्रसारण में बौद्धभिक्षुओं पर विदेशी मीडिया के हाथों में खेलने का आरोप लगाया और उन्हें विरोध प्रदर्शनों से दूर रहने को कहा.
बर्मा में कम के कम 25 शहरों और कस्बों में सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए हैं.
आशंका
संवाददाताओं ने बर्मा में 1988 की घटनाओं को दोहराने का अंदेशा जताया है. उस दौरान लोकतंत्र बहाली के आंदोलन को सैन्य शासकों ने कुचल दिया था और लगभग 3000 लोग मारे गए थे.
बर्मा में चल रहे विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत पिछले महीने हुई थी, जब सरकार ने ईंधन की क़ीमतें बढ़ाने का ऐलान किया था. हालाँकि विरोध में तेज़ी इस हफ़्ते धार्मिक नेताओं की भागीदारी बढ़ने के बाद आई है.
बौद्ध भिक्षुओं ने बर्मा के सैनिक शासकों को जनता का दुश्मन क़रार दिया था.