मंगलवार, 18 सितंबर, 2007 को 19:21 GMT तक के समाचार
बर्मा की सैनिक सरकार के ख़िलाफ़ सैकड़ों बौद्ध भिक्षुओं ने प्रदर्शन किए हैं. ये प्रदर्शन पूर्व राजधानी रंगून और कम से कम चार अन्य शहरों में हुए.
पिछले महीने बढ़ती महंगाई के विरोध में सिलसिलेवार प्रदर्शन हुए थे जिनका सुरक्षा बलों ने बड़े हिंसात्मक ढंग से दमन किया गया था.
इसमें कई भिक्षुओं की पिटाई भी की गई थी.
इसके बाद उन्होंने सरकार को क्षमा मांगने के लिए सोमवार की रात तक का समय दिया. लेकिन समय सीमा निकल गई और सरकार ने क्षमा याचना नहीं की.
अब बौद्ध भिक्षुओं ने कह दिया है कि वे सैन्य अधिकारियों और उनके परिवारों के लिए कोई धार्मिक अनुष्ठान नहीं करेंगे.
यह सैन्य अधिकारियों के लिए बड़ा भारी धक्का है क्योंकि बर्मा के लोग बड़े धर्म परायण हैं.
अभियान
बर्मा की सैनिक सरकार ने 15 अगस्त को पैट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों को दोगुना करने की घोषणा की थी जिसके बाद प्रदर्शनों का सिलसिला शुरु हुआ.
भिक्षुओं ने सरकार के विरोध में कम से कम पाँच शहरों में फिर प्रदर्शन किए हैं.
लेकिन सित्वे नामक शहर में सुरक्षा बलों ने भिक्षुओं को तितर बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया.
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कुछ भिक्षुओं की पिटाई हुई और कई को गिरफ़्तार किया गया. उन्होने देश भर में अपने अनुयायियों से कहा है कि सेना से जुड़े किसी भी व्यक्ति से दान दक्षिणा न ली जाए.
बर्मा के बौद्ध भिक्षुओं के एक नए संगठन ने यह विरोध अभियान शुरु किया है जिसका नेतृत्व युवा वर्ग के चरमपंथी भिक्षु कर रहे हैं.
इस संगठन के प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि उन्होने 1988 और 1990 में हुए प्रदर्शनों से सबक सीखा है जिन्हें सेना ने आसानी से दबा दिया था. लेकिन इस बार उनके नेता जोखिम नहीं उठाएंगे और छिपे रहेंगे.