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गुरुवार, 13 सितंबर, 2007 को 02:26 GMT तक के समाचार

शिशु मृत्यु दर में कमी आई

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष यानी यूनिसेफ़ का कहना है कि दुनिया भर में शिशु मृत्यु दर में कमी आई है. इसके चलते अब पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मौत पहले से कम हो रही है.

संयुक्त राष्ट्र चिल्ड्रन्स फंड का कहना है कि दुनिया भर में टीकाकरण की बढ़ी हुई सुविधाओं और मलेरिया पर प्रभावी नियंत्रण की वजह से ये परिणाम आए हैं.

वर्ष 2006 में पहली बार पाँच वर्ष से कम आयु के एक करोड़ से कम बच्चों की मौत हुई है.

उल्लेखनीय है कि 1990 में एक करोड़ तीस लाख से ज़्यादा बच्चों की मौत हुई थी.

घटती दर

बच्चों के मौत में सबसे ज़्यादा कमी मोरक्को और वियतनाम में दर्ज़ की गई है. इन देशों में बच्चों के मौतों की दर एक तिहाई कम हो गई है.

चीन में 1990 में जहाँ प्रति एक हज़ार बच्चों पर 45 बच्चों की मौत हो जाती थी वहीं 2006 में यह संख्या घटकर 24 रह गई थी. भारत में यह आँकड़ा 115 से घटकर 76 रह जाएगी.

कई अफ़्रीकी देशों में शिशु मृत्यु दर 75 प्रतिशत तक घटी है क्योंकि वहाँ टीकाकरण की सुविधाएँ बढ़ीं हैं.

यूनिसेफ़ की कार्यकारी निदेशक एन विनेमैन ने इसे एतिहासिक क्षण बताया है.

उनका कहना है कि जनस्वास्थ्य में हुए इस सुधार के आधार पर आगे काम किया जाना चाहिए.

लेकिन कुछ विशेषज्ञ यूनिसेफ़ के आंकड़ों के इस विश्लेषण पर सवाल उठाते हैं.

यूनिवर्सिटी ऑफ़ वॉशिंगटन के डॉ. क्रिस्टोफ़र मुरे का कहना है, "बच्चों को बचाने की जो कोशिशें आज हो रही हैं वह तीन दशक पहले की जा रही कोशिशों से बेहतर नहीं हैं."

उनका कहना है कि वर्ष 2006 में अफ़्रीकी देशों में पचाल लाख बच्चों की मौत हुई है जबकि दक्षिण एशिया में तीस लाख बच्चे मारे गए हैं.

तर्क दिया गया है कि एचआईवी और एड्स अभी भी बच्चों की जान ले रहा है और उनके लिए बेहतर दवाएँ उपलब्ध करवाना चाहिए.