गुरुवार, 06 सितंबर, 2007 को 07:54 GMT तक के समाचार
फ़ैंक गार्डनर
बीबीसी के सुरक्षा संवाददाता
चीन के कंप्यूटर हैकरों पर आरोप लगा है कि वो ब्रिटेन के महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों में लगाए गए कंप्यूटरों को 'हैक' कर रहे हैं यानी उन पर पाई जाने वाली सामग्री से छेड़छाड़ कर रहे हैं.
जिन महत्वपूर्ण ब्रितानी संस्थानों के बारे में ये कहा गया है उनमें ब्रितानी संसद और विदेश मंत्रालय शामिल हैं.
लेकिन चीनी अधिकारियों ने इस तरह की किसी गतिविधि में शामिल होने से इनकार किया है.
आरोप ये है कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर चीनी हैकर इन संस्थानों के कंप्यूटरों से वो जानकारी लेने की कोशिश कर रहे हैं जो सरकार सार्वजनिक नहीं करना चाहती.
इन गतिविधियों को साइबर हैकिंग या साइबर जासूसी कहते हैं.
अमरीका, जर्मनी पर निशाना
ग़ौरतलब है कि ऐसी ख़बरें आई हैं कि जून महीने में अमरीकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन में भी चीनी सेना के हैकरों ने सफलतापूर्वक घुसपैठ की थी. अमरीका से पहले चीनी सेना के हैकरों ने जर्मनी के कंप्यूटरों को निशाना बनाया था.
लेकिन चीनी अधिकारियों के इन आरोपों को ख़ारिज करने के बाद ब्रितानी सरकार सार्वजनिक तौर पर चीन की सरकार के साथ इस मुद्दे पर टकराव नहीं चाहती है.
इसका एक कारण ये है कि ये निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि ब्रिटेन और अमरीका चीन के कंप्यूटरों को हैक करने की कोशिश कर रहे हैं.
इस मामले पर ब्रिटेन के रॉयल युनाइटेड सर्विसिस इंस्टीट्यूट में एशियाई सुरक्षा कार्यक्रम के अध्यक्ष एलेक्स नील का कहना है, "ये तो मानकर ही चलना चाहिए कि यदि कोई थोड़ी-बहुत भी प्रभावशाली गुप्तचर एजेंसी है तो वह ऐसी साइबर यानि इंटरनेट गतिविधियों में ज़रूर भाग लेगी."
इस पूरे मामले पर सरकार चाहेगी कि वह चुप रहे लेकिन ये बात सार्वजनिक हो जाने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों पर दबाव है कि वे चीन से अनुरोध करें कि वह ऐसी गतिविधियाँ बंद करे.