शनिवार, 01 सितंबर, 2007 को 21:35 GMT तक के समाचार
अमरीकी सेना का कहना है कि शिया धार्मिक नेता के आदेश के मुताबिक अगर मेहदी आर्मी की गतिविधियाँ रुकती हैं, तो अल क़ायदा से निपटने में मदद मिलेगी.
अमरीकी कमांडरों का कहना है कि ऐसा होने से उनकी सेना इराक़ में अल क़ायदा का मुक़ाबला बेहतर तरीके से कर सकेगी.
अमरीकी बयान शिया मौलवी मुक़्तदा अल सद्र के आदेश के तीन बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था वो मिलिशिया गुट मेहदी आर्मी की गतिविधियाँ फ़िलहाल रोक रहे हैं ताकि उसे फिर से संगठित किया जा सके.
मेहदी आर्मी की बग़दाद और इराक़ के दक्षिणी हिस्सों में सशक्त उपस्थिति है.
उस पर जातीय हमले उकसाने के आरोप लगते रहे हैं और इसी साल अप्रैल में अमरीकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने मेहदी आर्मी को इराक़ में शांति के रास्ते की सबसे बड़ी बाधा बताया था.
हालाँकि गतिविधियाँ रोकने का मतलब अमरीकी सेना पर भी हमले रोकना है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है.
रणनीति
मुक़्तदा अल सद्र ने अपने सभी कार्यालयों से कहा है कि वे सुरक्षाकर्मियों के साथ सहयोग करें और ख़ुद पर सयंम रखें.
जानकारों का मानना है कि ये क़दम मुक़्तदा अल सद्र की ओर से एक कोशिश है कि वो अपने गुट पर फिर से नियंत्रण पा सकें जो लगातार बँटता जा रहा है.
ये घोषणा करबला में एक पत्रकार वार्ता में की गई जहाँ मंगलवार को झड़पों में 50 से ज़्यादा लोग मारे गए थे.
पुलिस ने इसके लिए मेहदी आर्मी को दोषी ठहराया है लेकिन मेहदी आर्मी ने इससे इनकार किया है.
करबला में फ़िहलाल कर्फ़्यू लगा हुआ है और वहाँ स्थिति शांतिपूर्ण बताई जा रही है.
संगठित करने की कोशिश
करबला में हुई पत्रकार वार्ता में मुक़तदा अल सद्र के एक सहयोगी ने बयान पढ़ा और घोषणा की कि मेहदी आर्मी ने अपनी सभी गतिविधियाँ स्थगित कर दी हैं.
शेख हाज़िम अल-अराजी ने कहा, "हमने संगठन की गतिविधियाँ स्थगित कर दी हैं ताकि उसे इस तरीके से संगठित किया जा सके कि उसकी वैचारिक छवि बरक़रार रहे. "
वहीं नजफ़ में एक अन्य प्रवक्ता ने बताया कि इस आदेश में 'क़ब्ज़ा करने वालों समेत अन्य लोगों के ख़िलाफ़' हथियार न उठाना शामिल है.
मेहदी आर्मी का गठन वर्ष 2003 में नजफ़ में शिया धार्मिक अधिकारियों की रक्षा के लिए किया गया था.