शनिवार, 01 सितंबर, 2007 को 07:35 GMT तक के समाचार
चीन में ऐसे नए नियम लागू हो रहे हैं जिसके तहत तिब्बत के धार्मिक गुरू दलाई लामा के चयन में चीन की सरकार की अहम भूमिका हो जाएगी.
ये नए नियम शनिवार से प्रभावी हो जाएंगे यानी तिब्बती बौद्ध धर्म गुरू को तय करने में चीन की सरकार का हस्तक्षेप बढ़ जाएगा.
चीन सरकार के क़दम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दिल्ली में दलाईलामा के प्रवक्ता टेम्पा सेरिंग ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है और चीन अपने राजनीतिक लाभ के लिए धर्म के क्षेत्र में दखल दे रहा है.
दरअसल, तिब्बत के अधिकाँश लोगों का मानना है कि दलाई लामाओं के निधन के बाद उनका पुनर्जन्म होता है.
नए नियमों के अमल में आने का मतलब है कि भविष्य में दलाई लामा के 'पुनर्जन्म' पर चीन की कम्युनिस्ट सरकार की मुहर लगनी ज़रूरी होगी.
मौजूदा दलाई लामा पहले ही अपने उत्तराधिकारी की घोषणा कर चुके हैं जबकि चीन सरकार ने एक अन्य बालक को तिब्बत का अगला धार्मिक गुरु नामित किया है.
लेकिन बताया ज रहा है कि दोनों ही 'उत्तराधिकारी' लंबे समय से सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं.
बीबीसी संवाददाता के मुताबिक चीन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि दलाई लामा के चयन की प्रक्रिया में उसकी भूमिका अहम होगी.
इसकी वजह यह भी है कि मौजूदा दलाई लामा के साथ चीन सरकार के संबंध अच्छे नहीं है.
दुर्भाग्यपूर्ण
दिल्ली में दलाईलामा के प्रवक्ता टेम्पा सेरिंग ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि चीन सरकार का यह प्रयास दुर्भाग्यपूर्ण है और वह अपने राजनीतिक लाभ के लिए धर्म के क्षेत्र में दखल देने का प्रयास कर रही है.
उनका कहना था कि यह क़दम चीन के अपने संविधान के भी ख़िलाफ़ है जो धर्म और मानवअधिकार के मामले में स्वतंत्रता देने की बात करता है.
दलाईलामा के प्रवक्ता का कहना था कि चीन बहुत पहले से तिब्बतियों के धार्मिक मामले में दखल देने का प्रयास कर रहा है.
उन्होंने 1995 का उदाहरण देते हुए बताया कि तब दलाई लामा ने पंचेन लामा को चुना था लेकिन चीन ने उसे अस्वीकार करते हुए अपनी ओर से एक और पंचेन लामा थोप दिया.
उनका कहना था कि नतीजा यह हुआ कि चीन का पंचेन लामा तिब्बत में अपने मठ में भी नहीं रह पाया और अब चीन के बीजिंग में रह रहा है.
आलोचना
दलाई लामा ने अपने हज़ारों अनुयायियों के साथ 1959 में तिब्बत से पलायन कर दिया था और तब से वो भारत के हिमाचल प्रदेश राज्य के धर्मशाला में तिब्बत की निर्वासित सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं.
उन्होंने तमाम देशों की यात्रा के दौरान इस बात पर ज़ोर दिया है कि तिब्बत को चीन सरकार से और अधिक स्वायत्तता मिलनी चाहिए.
चीन सरकार इस माँग से सहमत नहीं है. वो गाहे-बगाहे दलाई लामा पर पृथकतावादी होने का आरोप लगाती रही है.
अब दलाई लामा भारत में रहते हैं लिहाजा उनकी गतिविधियों को नियंत्रित करने का चीन के पास कोई विकल्प नहीं है.
वर्ष 1995 में दलाई लामा ने छह वर्षीय बालक को अपना उत्ताराधिकारी घोषित किया था, लेकिन तीन दिन बाद ही यह बालक अपने माता-पिता समेत ग़ायब हो गया.
नए नियम के अनुसार दलाई लामा के उत्तराधिकारी की नियुक्ति में चीन किसी बाहरी व्यक्ति या संगठन का 'दख़ल' सहन नहीं करेगा.
अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमरीकी आयोग का कहना है कि नए नियम से बौद्ध भिक्षुओं के उनके नेता के चयन के अधिकार को नुक़सान पहुँचेगा.