बुधवार, 29 अगस्त, 2007 को 15:23 GMT तक के समाचार
इराक़ में शिया मौलवी मुक़तदा अल सद्र ने कहा है कि वे मिलिशिया गुट मेहदी आर्मी की गतिविधियाँ फ़िलहाल रोक रहे हैं ताकि उसे फिर से संगठित किया जा सके.
उन्होंने अपने सभी कार्यालयों से कहा है कि वे सुरक्षाकर्मियों के साथ सहयोग करें और ख़ुद पर सयंम रखें.
जानकारों का मानना है कि ये क़दम मुक़तदा अल सद्र की ओर से एक कोशिश है कि वो अपने गुट पर फिर से नियंत्रण पा सकें जो लगातार बँटता जा रहा है.
ये घोषणा करबला में एक पत्रकार वार्ता में की गई जहाँ मंगलवार को झड़पों में 50 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं.
पुलिस ने इसके लिए मेहदी आर्मी को दोषी ठहराया है लेकिन मेहदी आर्मी ने इससे इनकार किया है.
करबला में फ़िहलाल कर्फ़्यू लगा हुआ है और वहाँ स्थिति शांतिपूर्ण बताई जा रही है.
संगठित करने की कोशिश
करबला में हुई पत्रकार वार्ता में मुक़तदा अल सद्र के एक सहयोगी ने बयान पढ़ा और घोषणा की कि मेहदी आर्मी ने अपनी सभी गतिविधियाँ स्थगित कर दी हैं.
शेख हाज़िम अल-अराजी ने कहा, "हमने संगठन की गतिविधियाँ स्थगित कर दी हैं ताकि उसे इस तरीके से संगठित किया जा सके कि उसकी वैचारिक छवि बरक़रार रहे. "
वहीं नजफ़ में एक अन्य प्रवक्ता ने बताया कि इस आदेश में 'क़ब्ज़ा करने वालों समेत अन्य लोगों के ख़िलाफ़' हथियार न उठाना शामिल है.
अप्रैल 2007 में अमरीकी रक्षा मंत्रालय ने मेहदी आर्मी को इराक़ की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा ख़तरा बताया था.
पिछले कुछ महीनों में मिलिशिया कई गुटों में बँट गया है और अमरीका का कहना है कि इनमें से कुछ को ईरान प्रशिक्षण देता है.
मेहदी आर्मी का गठन वर्ष 2003 में नजफ़ में शिया धार्मिक अधिकारियों की रक्षा के लिए किया गया था.
मेहदी आर्मी इराक़ में अमरीका के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन के ख़िलाफ़ रही है और सुरक्षाकर्मियों के ख़िलाफ़ 2004 में चले बड़े अभियान में उसने हिस्सा लिया था.
सुन्नी अरबों पर हमलों में भी मेहदी आर्मी का नाम आता रहा है.
मेहदी आर्मी दक्षिणी इराक़ में बड़ा हथियारबंद गुट है. एक रिपोर्ट के मुतिबक इसके करीब साठ हज़ार सदस्य हैं.