मंगलवार, 21 अगस्त, 2007 को 23:30 GMT तक के समाचार
अमरीका में एक जांच रिपोर्ट में देश की केंद्रीय जाँच एजेंसी (सीआईए) के पूर्व अध्यक्ष पर आरोप लगाया गया है कि 11 सितंबर के चरमपंथी हमलों से पहले वो अल क़ायदा से निपट पाने में असमर्थ रहे थे.
सीआईए के पूर्व प्रमुख जॉर्ज टेनेट के लिए इस रिपोर्ट में कहा गया है कि हमलों से पहले अल-क़ायदा के ख़िलाफ़ वो एक प्रभावी रणनीति नहीं बना सके थे.
इस रिपोर्ट में कही गई बातों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जॉर्ज टेनेट ने कहा है कि यह रिपोर्ट ग़लत और निराधार है.
सीआईए की इस आंतरिक रिपोर्ट में कहा गया है कि टेनेट ने 1998 के दिसंबर महीने में ही कह दिया था कि अमरीका युद्ध की स्थिति में है पर इसके बाद सीआईए का ध्यान युक्तियाँ खोजने में ही लगा रहा.
इस दौरान वो अपने पद का उपयोग अल क़ायदा के ख़िलाफ़ एक प्रभावशाली रणनीति बनाने में नहीं कर सके.
रिपोर्ट के मुताबिक इस दिशा में कोई भी ठोस और व्यापक रणनीति बनाई ही नहीं गई और इसकी अंतिम रूप से ज़िम्मेदारी तत्कालीन सीआईए अध्यक्ष पर जाती है.
ग़ौरतलब है कि 11 सितंबर 2001 में अमरीका के न्यूयॉर्क शहर में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमलों में क़रीब 3000 लोगों की मौत हो गई थी.
रिपोर्ट
ग्यारह सितंबर के इन हमलों के संदर्भ में सीआईए की ओर से जाँच का काम 2005 में ही पूरा कर लिया गया था पर इसे सार्वजनिक नहीं किया गया था.
इसके बाद संसद में एक विधेयक पारित करके इसे सार्वजनिक किया गया.
रिपोर्ट इस बात की ओर साफ़ इशारा करती है कि 11 सितंबर के हमलों के पहले चरमपंथ से निपटने की दिशा में जो प्रयास हुए उनमें परस्पर सहयोग, योजनाबद्ध काम और संसाधनों के उपयोग जैसी बातों का अभाव ही रहा.
हालांकि रिपोर्ट एक भी ऐसी कमी की ओर इशारा नहीं करती है जिसके लिए कहा जा सके कि यदि उसे रोक लिया जाता तो 11 सितंबर के हमले न होते.
तत्कालीन सीआईए प्रमुख ने जहाँ एक ओर इस रिपोर्ट में कही गई बातों को ग़लत बताया है वहीं वर्तमान अध्यक्ष ने कहा है कि इस रिपोर्ट का सार्वजनिक होना विभाग की मंशा से नहीं बल्कि संसद के विधेयक के अनुरूप तय हुआ है.
उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट में कही गई बातों के सार्वजनिक होने से उन अधिकारियों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है जो देश को अंतरराष्ट्रीय मोर्चों पर लड़ने में मदद कर रहे हैं.