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शुक्रवार, 17 अगस्त, 2007 को 21:02 GMT तक के समाचार

'भारत को यूरेनियम बेचने का फ़ैसला सही'

आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री जॉन हावर्ड ने भारत को यूरेनियम बेचे जाने के अपने फ़ैसले को सही ठहराया है.

लंबे समय से ऑस्ट्रेलिया का रुख यह रहा है कि वो किसी भी ऐसे देश को परमाणु सामग्री का निर्यात नहीं करेगा जिसने परमाणु अप्रसार संधि(एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं किया हो.

भारत ने एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और साथ ही परमाणु हथियार भी बना लिए हैं.

जॉन हावर्ड ने कहा कि इसके जरिए भारत पर बेहतर तरीके से अंतरराष्ट्रीय निगरानी और ग्लोबल वार्मिंग को कम करने में मदद मिलेगी.

जॉन हावर्ड ने कहा,"भारत का अब तक का परमाणु अप्रसार का रिकार्ड बहुत अच्छा रहा है इसलिए उसे एनपीटी पर हस्ताक्षर करने की बाध्यता नहीं है. इसलिए हम सोचते हैं कि उन्हें परमाणु अप्रसार की मुख्यधारा में लाने का यह अच्छा तरीका होगा."

विश्व में यूरेनियम के ज्ञात स्रोतों का 40 फ़ीसदी भंडार आस्ट्रेलिया के पास हैं और वह इसकी बिक्री को लेकर शुरु से ही बेहद सचेत रहा है.

नीति में बदलाव

आस्ट्रेलिया की नीति रही है कि वह सिर्फ़ उन्हीं देशों को यूरेनियम की बिक्री करेगा जिन्होंने एनपीटी पर हस्ताक्षर किए हों और जो रेडियोएक्टिव पदार्थ को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए ही इस्तेमाल करें.

और ये देश इन परमाणु सामग्रियों की बिक्री किसी तीसरे देश को नहीं कर सकते.

भारत को यूरेनियम बेचने का फ़ैसला लेकर ऑस्ट्रेलिया में अपनी परमाणु नीति में व्यापक बदलाव किया है.

ऑस्ट्रेलिया में कुछ ही महीनों बाद चुनाव हैं और वहाँ के मुख्य विपक्षी दल लेबर पार्टी ने कहा है कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो वो किसी भी तरह के करार को रद्द कर देगी.

अमरीका से परमाणु करार होने के बाद ऑस्ट्रेलिया ने भारत को यूरेनियम देने की बात कही है.

अमरीका के साथ हुए करार के तहत भारत अमरीका की असैनिक परमाणु तकनीकी का इस्तेमाल कर सकेगा और ईंधन को दोबारा इस्तेमाल में ला सकेगा.

सिद्धांततः इसका मतलब यह है कि भारत और अधिक परमाणु हथियार बना सकेगा.

अभी भारत के पास लगभग 70 से 120 परमाणु हथियार हैं.