बुधवार, 01 अगस्त, 2007 को 20:10 GMT तक के समाचार
अमरीकी राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के दावेदार डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर बराक ओबामा का कहना है कि यदि पाकिस्तान में अल क़ायदा के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई की ज़रूरत पड़ी तो वो पाकिस्तान सरकार की अनुमति के बिना भी ऐसा करेंगे.
बराक ओबामा ने ये बात अपनी विदेश नीति को स्पष्ट करते हुए कही.
दूसरी ओर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अल क़ायदा के ख़िलाफ़ उनके देश में कार्रवाई के मुद्दे से राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए.
उल्लेखनीय है कि हिलेरी क्लिंटन भी डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी की दावेदार हैं और उन्होंने हाल में कहा था कि बराक ओबामा को विदेश नीति के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है.
अपने भाषण में ओबामा ने कहा कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को अपने देश से चरमपंथी गतिविधियों को समाप्त करने के लिए और क़दम उठाने चाहिए.
उनका कहना था कि यदि वे अमरीका के राष्ट्रपति बने तो पाकिस्तान में सैन्य अभियान किया जा सकता है और उसकी करोड़ों डॉलर की अमरीकी सहायता रोकी जा सकती है.
ओबामा का कहना था,'' अल क़ायदा के नेता जब 2005 में बैठक कर रहे थे, उस दौरान कार्रवाई न किया जाना एक बड़ी ग़लती थी.''
कार्रवाई पर बहस
ग़ौरतलब है कि ऐसी ख़बरें आईं थीं कि अमरीका ने उस दौरान पाकिस्तान के साथ संबंध ख़राब होने के कारण कार्रवाई नहीं की थी.
ओबामा ने कहा,'' यदि हमारे पास बड़े चरमपंथियों के बारे में गुप्तचर सूचना है और राष्ट्रपति मुशर्रफ़ कार्रवाई नहीं करते हैं तो हमें वहाँ कार्रवाई करनी चाहिए.''
समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता तस्नीम असलम का कहना था,'' सैन्य कार्रवाई की बात करना गंभीर विषय है और उम्मीदवारों और टीकाकारों को इस बारे में ज़िम्मेदारी दिखानी चाहिए.''
दूसरी ओर व्हाइट हाउस के प्रवक्ता टोनी स्नो ने पाकिस्तानी नेतृत्व का बचाव किया और कहा कि वह अल क़ायदा और तालेबान के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रहा है.
इसके पहले पाकिस्तान ने कहा था कि वह ओसामा बिन लादेन के ख़िलाफ़ अपने देश के किसी हिस्से पर होने वाले अमरीकी हमले का विरोध करेगा.
पाकिस्तान के विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी ने कहा था कि उनके देश का जनमत ऐसे किसी हमले को स्वीकार नहीं करेगा.
उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले अमरीका ने कहा था कि ओसामा बिन लादेन को पकड़ने या मारने के लिए अमरीका कुछ भी करने को तैयार है जिसमें पाकिस्तान के क़बायली इलाक़े पर हमला भी शामिल है.