शुक्रवार, 27 जुलाई, 2007 को 10:55 GMT तक के समाचार
पिछले कई महीनों से ब्रिटेन में वेल्स के स्कंद वेल मंदिर और वेल्स सरकार के बीच विवाद का केंद्र रहे पवित्र बैल शंभू को मार दिया गया. शंभू टीबी से ग्रस्त था.
वैसे गुरुवार को ही शंभू को मारा जाना था लेकिन वेल्स मंदिर में भिक्षुकों और भक्तों के विरोध के कारण इसमें देरी हुई.
पहले अधिकारियों से वारंट मांगा गया और जब अधिकारी वारंट लेकर पहुँचे तो उन्हें एक बार फिर विरोध का सामना करना पड़ा.
दिन भर चली रस्साकशी के बाद गुरुवार शाम को अधिकारी शंभू को मारने के लिए ले गए. इस काम में पुलिसवालों की भी सहायता लेनी पड़ी.
ब्रिटेन में वेल्स एसेंबली ने संक्रमण फैलने के डर से टीबी से पीड़ित शंभू को मारने का आदेश दिया था. हाल में लंदन की एक अदालत ने इस फ़ैसले को सही ठहराया था.
विविध धर्मों की मान्यता वाले स्कंद वेल मंदिर से जुड़े लोग शंभू को मारे जाने का विरोध कर रहे थे.
ज़रूरत
अधिकारियों का कहना था कि अगर शंभू को मारा नहीं गया तो बीमारी अन्य मवेशियों और यहाँ तक कि इंसानों में भी फैल सकती है.
हालांकि वेल्स सरकार ने मंदिर से सहयोग की अपील की थी. शंभू को बचाने के लिए इंटरनेट पर की गई अपील में लगभग बीस हज़ार लोगों ने हस्ताक्षर अभियान में हिस्सा लिया.
इसके अलावा लोग शंभू को रखने की जगह पर लगे वेबकैमरा के ज़रिए इस घटनाक्रम की पल-पल की जानकारी दी जा रही थी.
लेकिन शंभू को मारे जाने का समर्थन कर रहे किसानों समेत कई वर्गों का कहना था कि इससे और पशु भी संक्रमित हो सकते हैं.
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह वेल्स हाईकोर्ट ने यह कहते हुए शंभू को मारने पर रोक लगा दी थी कि ऐसा करने से लोगों की धार्मिक भावनाएँ आहत होंगी. लेकिन सोमवार को ऊपरी अदालत ने इस रोक को रद्द कर दिया था.