गुरुवार, 26 जुलाई, 2007 को 19:48 GMT तक के समाचार
ऑस्ट्रेलिया सरकार का कहना है कि यदि भारत और अमरीका के बीच असैनिक परमाणु समझौता हो जाता है तो वह भारत को यूरेनियम बेचने पर विचार करेगी.
ऑस्ट्रेलिया अब तक भारत को इसलिए यूरेनियम नहीं देता क्योंकि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं.
ऑस्ट्रेलिया की नीति है कि वह ऐसे किसी देश को यूरेनियम नहीं बेचेगा जिसने इस संधि पर हस्ताक्षर न किए हों और भारत इस संधि का हिस्सा नहीं है.
लेकिन अब ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री अलेक्ज़ेंडर डाउनर का कहना है कि यदि भारत और अमरीका के बीच असैनिक परमाणु समझौता हो जाता है तो उनका देश अपनी नीति पर पुनर्विचार करेगा.
भारत और अमरीका के बीच दो साल से असैनिक परमाणु समझौते पर चर्चा चल रही है. अगर यह समझौता हो पाता है तो अमरीका भारत को परमाणु ईंधन और तकनीक देगा.
बदले में भारत को अपने कुछ परमाणु ठिकाने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा निरीक्षकों को लिए खोलने होंगे और संयुक्त राष्ट्र के नियमों का पालन करना होगा.
हालांकि ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री ने तर्क दिया है कि जलवायु परिर्तन के चलते बढ़ते तापमान को ध्यान में रखते हुए ऑस्ट्रेलिया को अपनी नीति पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य होना पड़ा है.
लेकिन माना जा रहा है कि ऑस्ट्रेलिया पर भारत को यूरेनियम देने का दबाव बड़ा है क्योंकि उसने चीन को यूरेनियम देना शुरु कर दिया है.
हालांकि यह सच है कि भारत को अपनी बढ़ती ऊर्जा ज़रुरतों को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में यूरेनियम की ज़रुरत है.