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रविवार, 22 जुलाई, 2007 को 08:08 GMT तक के समाचार

सिडनी में एचआईवी-एड्स पर सम्मेलन

एचआईवी/एड्स पर दुनिया का सबसे बड़ा सम्मेलन ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में शुरू हुआ है.

सम्मेलन में 130 देशों से आए पाँच हज़ार से अधिक प्रतिनिधियों से सिडनी-घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए भी कहा जाएगा.

सम्मेलन के दौरान ख़तना से एचआईवी संक्रमण 60 फ़ीसदी तक कम होने के विषय पर भी चर्चा होगी.

इस दस्तावेज़ के मसौदे में कहा गया है कि अगर दुनिया से एड्स को मिटाना है तो सरकारों को एचआईवी पर किए जा रहे शोधों पर और अधिक संसाधन ख़र्च करने होंगे.

दस्तावेज़ में यह भी कहा गया है कि एचआईवी कार्यक्रमों पर किए जा रहे कुल ख़र्च का दस फ़ीसदी व्यय शोध पर किया जाना चाहिए.

घोषणा-पत्र में कहा गया है कि इससे नई दवाओं और तकनीकों को लागू करने का मौक़ा मिलेगा जिससे एचआईवी वायरस का संक्रमण रोकने, पता लगाने और उपचार करने में मदद मिलेगी.

सम्मेलन के दौरान ग़रीब देशों में मरीज़ों को दी जा रही एंट्री-रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) में हुई बढ़ोत्तरी पर भी चर्चा होगी.

अफ़्रीका में दस लाख से अधिक लोगों ने जून, 2006 तक एंट्री-रेट्रोवायरल थेरेपी ली थी जो 2003 की तुलना में दस गुना अधिक है.

एचआईवी पर रोक

लंबे समय से ये बात सामने आ रही थी कि अफ़्रीका के मुसलमानों में एचआईवी संक्रमण की दर ग़ैर-मुसलमानों की तुलना में कम थी.

लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा था कि ऐसा ख़तना की वजह से है या कम लोगों से यौन-संबंध रखने की वजह से.

कीनिया और युगांडा से मिले प्रमाणों से ये बात सिद्ध हो गई कि नवयुवकों में ख़तना की वजह से एचआईवी संक्रमण का ख़तरा 60 फ़ीसदी तक कम होता है.

कीनिया और युगांडा में 2000 लोगों की जाँच की गई जिसमें से आधे लोग ऐसे थे जिनका ख़तना हो चुका था.

हालांकि इस जांच में हैट्रोसेक्सुअल लोग ही शामिल थे यानी जो अपने से विपरीत लिंग के लोगों से ही यौन संपर्क बनाते हैं. इसलिए आदमियों का ख़तना एचआईवी संक्रमण रोकने का एक अच्छा माध्यम हो सकता है.