शनिवार, 21 जुलाई, 2007 को 15:06 GMT तक के समाचार
ऑस्ट्रेलिया में हिरासत में रखे गए भारतीय मूल के डॉक्टर मोहम्मद हनीफ़ के मामले में ऑस्ट्रेलियाई सरकार के रवैये को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं.
डॉक्टर मोहम्मद हनीफ़ को ब्रिटेन में हुए विफल बम हमलों के सिलसिले में हिरासत में लिया गया था.
ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने आरोप पत्र में कहा था कि डॉक्टर हनीफ़ ने अपने चचेरे भाइयों सबील और कफ़ील अहमद को मोबाइल फ़ोन के सिम कार्ड उपलब्ध करवाए और एक ‘आतंकवादी संगठन’ का सहयोग किया.
अदालत में जब अभियोग पक्ष ने इस बारे में अपनी दलील दी थी कि क्यों मोहम्मद हनीफ़ को ज़मानत नहीं मिलनी चाहिए, तो उन्होंने सिम कार्ड का हवाला दिया था.
सिम कार्ड
अभियोग पक्ष का कहना था कि ग्लासगो हवाईअड्डे में जिस आग लगे वाहन को घुसाने की कोशिश की गई थी उस वाहन से मोहम्मद हनीफ़ का सिम कार्ड बरामद किया गया था.
बीबीसी संवाददाता निक ब्रायंट का कहना है कि अब ऐसा लग रहा है कि ये जानकारी ग़लत है.
पुलिस सूत्रों ने एबीसी न्यूज़ और सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड अख़बार को बताया है कि सिम कार्ड उस जगह से नहीं मिला था जहाँ कार हमला करने की कोशिश की गई थी.ये बात अभियोग पक्ष की दलील को कमज़ोर करती है.
ऑस्ट्रेलियाई पुलिस इस बारे में सार्वजनिक तौर पर टिप्पणी नहीं कर रही है लेकिन पुलिस आयुक्त मिक किलटी ने अपने सहयोगियों का बचाव किया है.
डॉक्टर हनीफ़ के ख़िलाफ़ ऑस्ट्रेलियाई पुलिस ने आरोप तय कर दिए थे.
हालांकि बाद में उन्हें ज़मानत भी मिल गई लेकिन ज़मानत मिलने के कुछ ही घंटों बाद डॉक्टर हनीफ़ का वीज़ा रद्द कर उन्हें हिरासत में रखे जाने का फ़ैसला किया गया.
ऑस्ट्रेलिया के आव्रजन मंत्री केल्विन एंड्र्यू का कहना था कि उन्होंने मोहम्मद हनीफ़ का वीज़ा अपराधियों से संबंध के संदेह में रद्द किया है.
अब आव्रजन मंत्री ने कहा है कि सिम कार्ड की ख़बरों से उनके फ़ैसले पर कोई असर नहीं पड़ेगा.