अधिकारियों का कहना है कि जापान के उत्तर पश्चिम में भूकंप का एक बड़ा झटका महसूस किया गया.
इसकी वजह से दो लोगों की मौत हो गई और लगभग 150 लोग घायल हो गए हैं.
इससे वहाँ के एक परमाणु बिजलीघर के एक संयंत्र में आग लग गई थी.
पहले इससे छोटी सूनामी लहरों के उठने की आशंका जताई गई थी लेकिन बाद में ये चेतावनी वापस ले ली गई.
जापान के मौसम विभाग का कहना है कि टोक्यो से 260 किलोमीटर की दूरी पर नीगाता तटीय इलाक़े में 6.6 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए.
भूकंप के ये झटके सोमवार की सुबह महसूस किए गए और इसने टोक्यो की इमारतों को हिला कर रख दिया.
इन झटकों से नीगाता क्षेत्र में कई इमारतों के गिरने और अनेक लोगों के घायल होने की ख़बर है.
भूकंप के बाद काशीवाज़ाकी परमाणु संयंत्र से काला धुआँ उठते देखा गया.
लेकिन जापानी समाचार माध्यमों का कहना है कि वहाँ बिजली के एक ट्रांसफार्मर में आग लग गई थी और इससे रेडियोधर्मिता को कोई ख़तरा नहीं है.
जापान को भूकंप की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है.
अक्टूबर, 2004 में 6.8 तीव्रता का भूकंप आया था जिसमें 65 लोगों की मौत हो गई थी.
हाल के दिनों में जापान में सबसे बड़ा भूकंप 1995 में आया था. जब कोबे शहर 7.3 तीव्रता वाले भूकंप से हिल गया था. उस भूकंप में 6,400 लोग मारे गए थे.