शुक्रवार, 13 जुलाई, 2007 को 06:35 GMT तक के समाचार
सलीम रिज़वी
न्यूयॉर्क से
अमरीकी संसद में गुरुवार को उस वक्त इतिहास रच गया जब अमरीकी संसदीय प्रणाली के इतिहास में पहली बार वहाँ का कामकाज हिंदू धार्मिक मंत्रों के साथ शुरू किया गया.
हालांकि इस मंत्रोच्चार को उस वक्त सीनेट में विरोध का सामना भी करना पड़ा जब सीनेट में मौजूद कुछ लोगों ने इसके विरोध में नारे लगाने शुरू कर दिए.
गेरूआ वस्त्र पहने हुए जब पंडित राजन ज़ेड सीनेट के मंच पर पहुंचे तो कुछ लोगों ने नारेबाज़ी शुरू की जिसमें वह चिल्ला रहे थे कि यह नहीं होना चाहिए, हम इसाई हैं और राष्ट्रवादी भी हैं.
पुलिस ने संसद की कार्यवाही में खलल डालने के ज़ुर्म में तीन लोगों को गिरफ़्तार कर लिया है जिनमें एक पुरूष और दो महिलाएं शामिल हैं.
संसद में हिंदू धार्मिक ग्रंथों के अंश पढ़े जाने के खिलाफ़ कई हफ़्तों से कुछ ईसाई कट्टरपंथी लोग एक मुहिम चला रहे थे जिसमें ईसाईयों से अपील की जा रही थी कि वे संसद में हिंदू धार्मिक ग्रंथों के पढ़े जाने के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएं.
इन लोगों का तर्क था कि हिंदू धर्म में कई भगवानों को मान्यता दी जाती है जो ईसाई धर्म के एक भगवान के सिंद्वांत के ख़िलाफ़ है.
अंग्रेज़ी में मंत्र
बाधा की कोशिश के बावजूद पंडित राजन ज़ेड ने सीनेट में सबसे पहले गंगाजल छिड़क कर उसे पवित्र किया फिर गायत्री मंत्र का जाप शुरू किया औऱ ऋग्वेद, उपनिषद औऱ श्रीमदभगवदगीता से कुछ अंशों के अंग्रेज़ी अनुवाद पढ़कर सीनेट के कामकाज की शुरूआत की.
नियम के अनुसार धार्मिक ग्रंथों के अंशों को सिर्फ़ अंग्रेज़ी भाषा में ही पढ़ा जा सकता है इसलिए सीनेट में पंडित राजन ज़ेड ने उन मंत्रों का अंग्रेज़ी अनुवाद ही पढ़ा और ओम शांति..ओम शांति के जाप से प्रार्थना समाप्त की.
सेनेट के डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता हैरी रीड, जिनके निमंत्रण पर पंडित राजन ज़ेड सीनेट में प्रार्थना के लिए आए थे, ने सदन में अपने भाषण के दौरान इस प्रार्थना सभा के विरोध की भर्त्सना करते हुए कहा, “अगर किसी को भारतीयों और हिंदूओं के बारे में कोई ग़लतफ़हमी है तो वह सिर्फ़ इतना करें कि महात्मा गांधी के बारे में सोचें जिसने शांति के लिए अपनी जान तक दे दी थी.”
पंडित राजन ज़ेड ने प्रार्थना का विरोध करने वालों से अपील की कि सारे धर्मों के लोग आपस में मिलकर मानवता की भलाई के लिए काम करें.
परंपरा
वर्ष 1789 से ही अमरीकी सीनेट में यह रिवाज रहा है कि हर दिन सीनेट में काम शुरू होने से पहले प्रार्थना की जाती है जिसके लिए आमतौर पर ईसाई पादरी बाईबल के अंश पढ़ते हैं. इसके लिए एक ईसाई पादरी को खास तौर पर सीनेट में नियुक्त भी किया जाता है.
लेकिन वर्ष 1857 से अन्य धर्मों के लोगों को भी समय-समय पर अवसर दिया जाता रहा है कि वे सीनेट का कामकाज शुरू होने से पहले अपने धार्मिक ग्रंथों से भी कुछ अंश पढ़ें.
इस पूरी कार्यवाही के दौरान सदन में मौजूद सांसद पूरी लगन और आस्था के साथ इन धार्मिक ग्रंथों के पढ़े जाने को सुनते हैं और फिर अपने कामकाज में लग जाते हैं.
अन्य धर्मों में यहूदी और मुस्लिम धार्मिक गुरूओं को भी अपने धार्मिक ग्रंथों के अंश पढ़ने की दावत दी जा चुकी है.
पंडित राजन ज़ेड हिंदू धार्मिक गुरु के रूप में पहली बार इस अवसर के लिए चुने जाने पर बहुत खुश नज़र आए.
उन्होंने कहा, “यह अमरीकियों के साथ-साथ हमारे लिए भी एक स्मरणीय दिन है. मेरे और मेरे परिवार वालों के अलावा सारे भारतीयों और हिंदूओं के लिए भी यह एक सम्मान है कि अमरीकी सेनेट में हिंदू मंत्रों को पढ़ने का मौका मिला.”
सीनेट में पढ़े गए इन मंत्रों को अमरीकी संसदीय इतिहास के रिकार्ड में औपचारिक रूप से दर्ज भी कर लिया गया है.
इससे पहले इसी वर्ष पंडित राजन ज़ेड ने नेवादा राज्य की सेनेट और असेंबली में भी हिंदू ग्रंथों को पढ़कर राज्य सेनेट औऱ असेंबली में कामकाज की शुरूआत की थी.