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मंगलवार, 10 जुलाई, 2007 को 14:55 GMT तक के समाचार

ब्रजेश उपाध्याय
बीबीसी संवाददाता, वाशिंगटन से

हिलेरी का भारतप्रेम विवाद में घिरा

हिलेरी क्लिंटन का भारत के साथ चल रहा प्रेम-प्रसंग इन दिनों अमरीकी राजनीति में मोहल्ला रोमांस की तरह चर्चा में है.

बात यहाँ तक आ पहुँची है कि हिलेरी क्लिंटन पर भारतप्रेम के सामने देशप्रेम को अनदेखा करने के आरोप लग रहे हैं.

पिछले दिनों डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी की दौड़ में उनके सबसे निकतम प्रतिद्वंद्वी बराक ओबामा के गुट ने अमरीका में बसे भारतीयों के बीच उनकी लोकप्रियता पर कटाक्ष करते हुए उन पर पंजाब का सांसद होने का ताना मारा था.

उस मामले को शांत हुए महीना भी नहीं गुज़रा था कि अब एक नया विवाद उठ खड़ा हुआ है.

अमरीकी कार्पोरेट जगत में ऊँचे-ऊँचे पदों पर काम कर रहे और काफ़ी दबदबा रखने वाले आईआईटी के तीन हज़ार से ज़्यादा पूर्व छात्र हाल ही में कैलिफ़ोर्निया राज्य के सैंटा क्लारा शहर में जुटे थे.

इनमें नामी-गिरामी कंसल्टेंसी कंपनी मैंकेंजी एंड कंपनी के वरिष्ठ पार्टनर रजत गु्प्ता, गूगल की मोबाइल डिवीज़न के प्रमुख दिलीप वेंकटाचारी, माइक्रोसॉफ़्ट के कई दिग्गजों के अलावा अमरीकी कॉर्पोरेट जगत के कई ऐसे भी नाम यहाँ जुटे थे जिनका आईआईटी से कोई सीधा संबंध नहीं था.

नया विवाद

अमरीका में बसे भारतीयों की इस ताक़तवर लॉबी के इस सम्मेलन में पहुंचना था पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की पत्नी सेनेटर हिलेरी क्लिंटन को. हिलैरी वहां पहुंच तो नहीं पाईं लेकिन उन्होंने सैटेलाइट के जरिए उन्हें संबोधित किया.

शुरूआत की काफ़ी बच-बचाकर, अमरीकी राजनीति को ध्यान में रखते हुए.

उन्होंने कहा, "आउटसोर्सिंग को लेकर अमरीकियों को काफ़ी चिंता है और मैं मानती हूँ कि ये सही भी है. लेकिन इसके लिए अमरीका को अपने नागरिकों की कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए मेहनत करनी होगी, शिक्षा तंत्र को अपनी ज़रूरतों के अनुसार ढालना होगा.’’

लेकिन इसी से जुड़ा था एच-1बी वीज़ा का मामला जिसके तहत बड़ी-बड़ी अमरीकी कंपनियां भारत जैसे देशों से इंजीनियरों और अन्य तकनीकी कुशलता प्राप्त लोगों को नौकरी पर रख सकती हैं.

हिलेरी ने कहा, "मैं इस वीज़ा प्रोग्राम के हक़ में हूँ और इसकी संख्या बढ़ाने के प्रयासों को मेरा समर्थन मिलेगा." उन्होंने ये भी कहा कि आईआईटी के इंजीनियरों को "भारत और अमरीका दोनों ही की संपन्नता बढ़ाने के लिए काम करना चाहिए."

लेकिन एच-1बी वीज़ा पर उनके बयान ने मानो आप्रवासन पर कुछ हद तक ठंडी हो रही बहस को मानो एक नई जान दे दी. एक टेलीविज़न चैनल ने हेडलाइन लगाई---हिलेरीज़ हिपोक्रैसी यानी हिलेरी की दोमुंही बात.

चैनल का कहना था, "एक ओर तो वो आउटसोर्सिंग पर चिंता जताती हैं, दूसरी ओर एच-1बी वीसा बढ़ाने की बात करती हैं. क्या इन्हें अमरीका और अमरीकियों का बिल्कुल ख़्याल नहीं रह गया है."

रिपब्लिकन पार्टी के एक सांसद ने तो सीधा आरोप लगाया, "हिलेरी को अपने चुनाव के लिए भारतीयों से जिस अनुपात में चंदा मिल रहा है उसी अनुपात में वो वीज़ा बढ़ाने की बात कर रही हैं."

गहरी दोस्ती

क्लिंटन परिवार और भारतीय उद्योपतियों के बीच घनिष्ठ संबंधों की अक्सर यहाँ चर्चा होती है. कहा जाता है कि भारतीय मूल के संत चटवाल, जो यहां कई बड़े-बड़े होटलों के मालिक हैं, उनके साथ क्लिंटन परिवार की ख़ासी छनती है.

इसी मई में न्यूयॉर्क में भारतीय अमरीकी समुदाय ने हिलेरी के चुनाव के लिए दो लाख डॉलर इकठ्ठा किया था और संत चटवाल ने दावा किया था कि भारतीय अमरीकी समुदाय हिलेरी के चुनाव के लिए पचास लाख डॉलर की राशि जुटाएगी.

पिछले दिनों जब बराक ओबामा के गुट ने उन पर भारतीय लॉबी के साथ ज़्यादा ही घुलने-मिलने का आरोप लगाया था तो हिलेरी के साथ-साथ भारतीय गुटों ने भी उनकी भाषा पर कड़ी आपत्ति जताई थी. और ओबामा ने एक तरह से अपने प्रचार गुट के बयान के लिए माफ़ी मांगी थी.

हिलेरी क्लिंटन की ओर से फ़िलहाल इस नए विवाद पर कोई बयान नहीं आया है लेकिन ये तय लग रहा है कि एच-1बी वीज़ा एक बार फिर बहस का मुद्दा बनेगा.

बिल गेट्स और कार्पोरेट जगत के कई प्रमुख लोगों का कहना है कि इस वीज़ा पर एक निश्चित संख्या का जो प्रतिबंध है वही हटा देना चाहिए क्योंकि अमरीकी में तकनीकी कुशलता प्राप्त लोगों की भारी कमी है जिससे अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँच रहा है.

दूसरी ओर, राजनीतिक गुटों का कहना है कि व्यापार जगत इस वीज़ा के जरिए अमरीकियों को नज़रअंदाज़ करके कम कीमत पर विदेशियों को नौकरी दे रहा है और अमरीकी मध्यमवर्ग इसकी भारी कीमत चुका रहा है.