बुधवार, 04 जुलाई, 2007 को 01:31 GMT तक के समाचार
बीबीसी के ग़ज़ा स्थित संवाददाता एलन जॉन्स्टन को अपहरणकर्ताओं ने रिहा कर दिया है.
उनका लगभग चार महीने पहले ग़ज़ा में घर लौटते वक़्त अपहरण कर लिया गया था. उन्हें हमास के अधिकारियों को सौंपा गया.
टीवी तस्वीरों में वो एक इमारत से निकलकर एक सफ़ेद कार में प्रवेश करते हुए नज़र आए. इस दौरान उनके आसपास हथियारबंद लोग मौजूद थे.
तस्वीरों में वो बेहद कमज़ोर दिखाई दे रहे थे. हालांकि उनका कहना था कि वो थके हुए हैं लेकिन स्वस्थ हैं.
'रिहाई का ख्वाब'
हमास नेता इस्माइल हानिया के साथ पत्रकारों से बातचीत में एलन जॉन्स्टन ने उनकी रिहाई के लिए प्रयास करनेवाले सभी लोगों का शुक्रिया अदा किया.
उनका कहना था,'' मुक्त होना बेहद सुखद है.''
उन्होंने अपने अपहरण के दिनों को 'विस्मयकारी और कभी कभी डरावना बताया.'
जॉन्स्टन का कहना था,'' मैंने कई बार ऐसा ख्वाब देखा कि मैं स्वतंत्र हूँ और जब मैं जगा तो मैंने अपने को उसी कमरे में पाया.''
उनका कहना था कि वो स्कॉटलैंड में अपने परिवार से मिलने के लिए उत्सुक हैं.
एलन जॉन्स्टन का कहना था कि उनको बीबीसी वर्ल्ड सर्विस रेडियो के माध्यम से रिहाई के लिए चल रहे प्रयासों की जानकारी मिलती रहती थी.
घटनाक्रम
एलन जॉन्स्टन का 12 मार्च को आर्मी ऑफ़ इस्लाम नामक संगठन ने ग़ज़ा में तब अपहरण कर लिया गया था जब वे घर लौट रहे थे.
पिछले दिनों उन्हें अगवा करने वाले संगठन की ओर से एक वीडियो भी जारी किया गया था जिसमें जॉन्स्टन को एक आत्मघाती बेल्ट पहने दिखाया गया था.
45 वर्षीय एलन जॉन्स्टन ने 1991 में बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के लिए काम करना शुरू किया था.
सोलह साल के कैरियर में से आठ साल वो संवाददाता के रूप में काम करते रहे हैं. उन्होंने उज़बेकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में भी रिपोर्टिंग की.
वो पिछले क़रीब तीन साल से ग़ज़ा से रिपोर्टिंग कर रहे थे और वहीं रह रहे थे.
ग़ज़ा में हिंसक हालात में वह अकेले ऐसे पश्चिमी पत्रकार हैं जो स्थाई रूप से वहाँ रह रहे थे.
एलन जॉन्स्टन को रिहा किए जाने के लिए अनेक देशों में रैलियाँ भी हुईं और संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून और ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने भी उनकी रिहाई की अपील की थी.