शुक्रवार, 29 जून, 2007 को 03:42 GMT तक के समाचार
अमरीकी सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला दिया है कि अब स्कूल बच्चों को जाति के आधार पर दाखिला नहीं दे सकेंगे.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 'अफ़र्मेटिव एक्शन' के नाम से जातीय विविधता को स्थान देने के लिए कई अमरीकी स्कूलों में चलाई जाने वाली यह योजना भेदभाव पैदा करने वाली है.
यह 'अफ़र्मेटिव एक्शन' एक तरह से आरक्षण की सुविधा है जो जातीय अल्पसंख्यकों को स्कूलों में दाखिले का अधिकार देती है.
माना जा रहा है कि हाल के समय में नागरिक अधिकारों को लेकर अमरीकी अदालत का यह सबसे अहम फ़ैसला है.
इससे लाखों बच्चों पर असर होने के आसार हैं.
कई राजनीतिज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले की निंदा की है.
फ़ैसला
अमरीका में कोई आधी सदी पहले 'अफ़र्मेटिव एक्शन' की योजना तब बनी थी जब नागरिक अधिकारों की बात शुरु हुई थी.
हालांकि अब 'अफ़र्मेटिव एक्शन' को स्कूलों में लागू करना अनिवार्य नहीं रह गया है लेकिन अमरीका में ऐसे सैकड़ों स्कूल हैं जो इसी के आधार पर भर्ती करते हैं.
इस योजना के ख़िलाफ़ कुछ श्वेत अमरीकी अभिभावकों ने अपील की थी.
उनकी शिकायत थी कि उनके बच्चों को, उनकी पसंद के स्कूलों में सिर्फ़ इसलिए दाखिला नहीं दिया गया क्योंकि इससे स्कूल में 'अश्वेत बच्चों के कोटे' पर असर पड़ रहा था.
सुप्रीम कोर्ट के एक पीठ ने पाँच के मुक़ाबले चार के मतों से यह फ़ैसला दिया है.
अपने फ़ैसले में जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने कहा है, "जातीय आधार पर भेदभाव रोकने का तरीक़ा यही है कि जातीय आधार पर भेदभाव को रोक दिया जाए."
लेकिन उन चार जजों ने इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपना मत दिया है.
जस्टिस स्टीफ़न ब्रेयर ने लिखा है, "यह ऐसा फ़ैसला है जिस पर अदालत और राष्ट्र को अफ़सोस होगा."
विरोध करने वाले जजों का कहना था कि इस फ़ैसले से 1954 का ऐतिहासिक फ़ैसला उलट जाएगा.
विरोध
सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले की कई राजनीतिज्ञों ने तीखी निंदा की है.
सीनेट के नेता हैरी रीड ने कहा है कि अदालत का यह फ़ैसला भयावह है.
सीनेट के एक और सदस्य बराक ओबामा, जो अमरीका के पहले अश्लेत राष्ट्रपति बनने की उम्मीद लगाए हुए हैं, ने कहा कि यह फ़ैसला ग़लत दिशा में दिया गया फ़ैसला है.
कई सामाजिक संस्थाओं ने भी इस फ़ैसले का विरोध किया है.