बुधवार, 27 जून, 2007 को 00:41 GMT तक के समाचार
ईरान में निजी वाहनों के लिए ईंधन की सीमा निर्धारित किए जाने के बाद राजधानी तेहरान में मंगलवार की रात नौ पेट्रोल स्टेशनों पर हमला किया गया.
इस फ़ैसले के बाद राजधानी तेहरान में हिंसक झड़पें हुई हैं, हालाँकि किसी के मारे जाने की ख़बर नहीं है.
पहले आई ख़बरों में तीन लोगों के मारे जाने की बात कही गई थी.
तेहरान में कम से कम एक पेट्रोल पंप को आग लगा दी गई. पेट्रोल पंप स्टेशनों पर ईंधन लेने को लेकर वाहन चालकों के बीच झड़पें हुई और जहाँ-तहाँ यातायात बाधित हुआ.
ईरान सरकार ने केवल दो घंटे के नोटिस पर ये राशनिंग लागू की है.
अब निजी वाहन चालक एक महीने में 100 लीटर ईंधन या हर रोज़ तीन लीटर ईंधन खरीद सकते हैं जबकि लोगों की ज़रूरत कहीं ज़्यादा है. इसे लेकर लोगों में ख़ासी नाराज़गी है.
सरकारी रेडियो के अनुसार उपद्रवियों ने कई पेट्रोल स्टेशनों पर हमला किया, जबकि वेबसाइट राजा न्यूज़ के अनुसार तेहरान में नौ स्थानों पर भारी झड़पें हुई.
वेबसाइट के अनुसार लोगों ने कुछ पेट्रोल स्टेशनों को आग लगा दी, खिड़कियों के शीशे तोड़ दिए, पथराव किया और कुछ स्थानों पर कूड़े के ढेर में आग लगा दी.
प्रतिबंध की आशंका
सरकार के इस नए क़दम के बारे में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि किसी भी चुनी हुई सरकार के लिए ये ख़तरनाक क़दम है, ख़ासकर ऐसे देश में जहाँ तेल की बहुतायत है और लोग मानते हैं कि सस्ती दरों पर ईंधन मिलना उनका अधिकार है.
ईरान में तेल तो बहुत है लेकिन तेल शोधन की सुविधाएँ नहीं है. इस वजह से उसे पेट्रोल की कुल खपत में से 40 फ़ीसदी आयात करना पड़ता है.
तेहरान में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सरकार पेट्रोल की खपत कम करने की कोशिश कर रही है क्योंकि उसे डर है कि अगर परमाणु मुद्दे को लेकर विवाद गहराता है तो उस पर पश्चिमी देश प्रतिबंध लगा सकते हैं.
ईरान सरकार को डर है कि पश्चिमी देश पेट्रोल के आयात पर रोक लगा सकते हैं जिससे उसकी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा.
वैसे ईरान में पेट्रोल काफ़ी सस्ती दरों पर उपलब्ध है- अंतराष्ट्रीय बाज़ार की कीमत से लगभग 20 फ़ीसदी कम.
अभी तक ये नहीं बताया गया है कि ईरानी नागरिक बाज़ार की असल कीमत पर ज़्यादा पेट्रोल खरीद सकते हैं या नहीं.