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बुधवार, 13 जून, 2007 को 08:58 GMT तक के समाचार

ताकि नाम न गुमने पाए...

चीनी प्रशासन ने देश में बढ़ती उपनामों की समस्या से निपटने के लिए अनोखा तरीका ढूँढा है.

अब चीन सरकार कानून में परिवर्तन कर माता-पिता को अपने नामों को जोड़कर बच्चे के लिए नए उपनाम या सरनेम गढ़ने की स्वतंत्रता दे जा रहा है.

चीन में नाम इतने कम हैं कि एक अरब से अधिक की जनसंख्या वाले इस देश में 85 फ़ीसदी जनता 100 उपनामों पर ही निर्भर करती है.

उसके पास दूसरे विकल्प नहीं हैं.

अब तक बच्चे के नाम के साथ माता या पिता में से किसी एक का ही उपनाम जोड़ा जा सकता था.

चीनी अख़बार 'चाइना डेली' के अनुसार कानून में इस प्रकार का बदलाव करने से लगभग 10 लाख नए संभावित उपनाम अस्तित्व में आ सकेंगे.

अख़बार के छपी रिपोर्ट के अनुसार अगर पिता का नाम झुओऊ और माँ का नाम झू है तो बच्चे का नाम झू, झुओऊ, झूझुओऊ या झुओऊझु हो सकता है.

चीन के जन सुरक्षा मंत्रालय ने ये प्रस्ताव पुलिस विभाग को भेज दिया गया है.

ऐसा माना जा रहा है कि इस कवायद से जांच के समय होने वाली परेशानियों से निज़ात पाने में सहायता मिलेगी.

समस्या

एक तरह के नाम होने की वजह से बहुत भ्रम पैदा हो जाता है.

चीन में वांग उपनाम के ही 9.3 करोड़ लोग हैं. बीजिंग में ही करीब डेढ़ करोड़ लोग वांग उपनाम अपने नाम के साथ जोड़ते हैं.

शंघाई शहर में करीब 9 लाख लोग झांग उपनाम अपने नाम के साथ लगाते हैं.

शंघाई में रहने वालों के मुताबिक़ एक ही तरह के इतने नाम हो जाने से कई बार स्कूलों और बैंकों में समस्या हो जाती है. यानी स्कूल आता कोई और है हाज़िरी किसी और की लग जाती है या किसी के खाते का पैसा किसी और के खाते में चला जाता है.

चीन के एक समाचारपत्र यूथ डेली का कहना है कि इस तरह एक ही नाम के लाखों लोग होने से सामाजिक समस्या खड़ी हो रही है.